जयपुर: दिल्ली की प्रेस वार्ता में गरजी भाजपा, मदन राठौड़ का डोटासरा पर तीखा प्रहार; बोले- 'कांग्रेस के पास न अनुशासन, न कार्यकर्ता'
जयपुर/दिल्ली समाचार: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गोविंद सिंह डोटासरा के बयानों को 'असंसदीय' और 'स्तरहीन' बताते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। परिसीमन विवाद और संगठनात्मक अनुशासन पर बोलते हुए राठौड़ ने कांग्रेस को हार के डर से ग्रसित बताया और प्रधानमंत्री मोदी व जे.पी. नड्डा की कार्यसंस्कृति की सराहना की। राजस्थान राजनीति की यह पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

नई दिल्ली/जयपुर, 20 जनवरी 2026। राजस्थान की सियासत में जुबानी जंग एक नए शिखर पर पहुंच गई है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब व्यक्तिगत और संगठनात्मक प्रहारों में तब्दील हो चुका है। नई दिल्ली प्रवास के दौरान एक बेहद कड़े और आक्रामक अंदाज में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रेस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। राठौड़ ने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यशैली और उनकी भाषा पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा कि डोटासरा का राजनीतिक व्यवहार अब उस स्तर पर पहुंच गया है जहाँ वे 'बोलते पहले हैं और सोचते बाद में' हैं। उन्होंने डोटासरा के बयानों को न केवल स्तरहीन बताया, बल्कि उन्हें संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि 'बेईमान' जैसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग डोटासरा की मानसिक हताशा और राजनीतिक गिरावट का जीता-जागता प्रमाण है।
राजस्थान में आगामी स्थानीय चुनावों की आहट के बीच पंचायतों और जिला परिषदों के परिसीमन को लेकर मची रार पर मदन राठौड़ ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि परिसीमन कोई राजनीतिक खेल नहीं बल्कि निर्वाचन आयोग की एक शुद्ध संवैधानिक प्रक्रिया है। राठौड़ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए संगीन आरोप लगाया कि अतीत में कांग्रेस सरकारों ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या जैसे घुसपैठियों को वोटर बनाकर क्षेत्रीय डेमोग्राफी बदलने का काम किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज जब एसआईआर के माध्यम से इन बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं, तो कांग्रेस की बेचैनी समझी जा सकती है। राठौड़ के अनुसार, कांग्रेस की यह पुरानी फितरत है कि वह जीत का श्रेय खुद लेती है लेकिन हार की आहट मिलते ही ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर दोष मढ़ने के लिए 'बहाने' तैयार करने लगती है।
संगठनात्मक शक्ति के मोर्चे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए मदन राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जहाँ भाजपा में प्रधानमंत्री स्वयं को एक साधारण कार्यकर्ता और पार्टी अध्यक्ष को 'बॉस' मानते हैं, वहीं कांग्रेस में अनुशासन का नामोनिशान नहीं है। राठौड़ ने इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा आज नई पीढ़ी को तैयार कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की कार्यक्षमता और उनके पारिवारिक राजनीतिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्हें एक बेहतर कार्यकर्ता बताया, जो संगठन को नई ऊर्जा देंगे। साथ ही, उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के हालिया उद्बोधन को कार्यकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शक 'पाथेय' बताया।
मदन राठौड़ ने अपने संबोधन के समापन पर राजनीति में 'स्पोर्ट्समैन स्पिरिट' यानी खेल भावना की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि हारने पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि व्यवस्थाओं पर कीचड़ उछालना चाहिए। राठौड़ का यह बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा न केवल चुनावी मैदान में बल्कि संगठनात्मक और नैतिक धरातल पर भी कांग्रेस को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की इस प्रेस वार्ता से उठी चिंगारी जयपुर की राजनीति में आने वाले दिनों में क्या नया रुख अख्तियार करती है।

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