जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पेपर लीक और भ्रष्टाचार के जिन्न ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस शासन को 'चोरों को थानेदार बनाने वाली सरकार' करार देते हुए युवाओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ की परतों को उधेड़ा। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकाल में योग्य अभ्यर्थियों के सपनों का गला घोंटकर अपात्रों को पिछले दरवाजे से प्रवेश दिया गया, जबकि वर्तमान भजनलाल सरकार ने 326 परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराकर सुशासन की एक नई इबारत लिखी है।

घटनाक्रम की गहराई में उतरते हुए अरुण चतुर्वेदी ने एसओजी द्वारा हाल ही में उजागर किए गए कृषि पर्यवेक्षक, प्रयोगशाला सहायक और महिला सुपरवाइजर भर्ती धांधली का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ओएमआर शीट बदलकर अयोग्य लोगों को फायदा पहुँचाया गया। उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2019 को उत्तर प्रदेश में 61.50 लाख रुपये के साथ अभियुक्त पकड़े गए थे और एफआईआर भी दर्ज हुई थी, किंतु तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों तक केवल लीपा-पोती की और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति पर हाथ डालने की जहमत नहीं उठाई।

भाजपा के शासन में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि 28 फरवरी 2025 को जब यह मामला एसओजी को सौंपा गया, तब जाकर न्याय की उम्मीद जगी। इस तत्परता का परिणाम यह रहा कि कांग्रेस शासन के पेपर लीक मामलों में अब तक 428 लोगों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें एसआई भर्ती परीक्षा के 138 आरोपी भी शामिल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जांच समितियों में उन्हीं लोगों को बिठाया गया जो स्वयं संदिग्ध थे। चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा ने एक वर्ष का परीक्षा कैलेंडर जारी कर युवाओं को स्पष्ट राह दिखाई है, जबकि कांग्रेस के समय 19 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और 133 मुकदमों के बावजूद न्याय शून्य रहा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने भी कांग्रेस पर हमलावर होते हुए उसे अपराध और माफिया का पर्याय बताया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से सवाल किया कि आखिर शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने आरपीएससी के उन सदस्यों और अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जो इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल थे? गहलोत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब नैतिकता की दुहाई देने का हक खो चुकी है क्योंकि भ्रष्टाचार के प्रमाण अब जनता के सामने हैं। इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी, कैलाश मेघवाल और प्रदेश कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया।

Pratahkal Newsroom

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