जयपुर बर्ड फेस्टिवल 2026: विशेषज्ञों ने किया सांभर और प्रमुख वेटलैंड्स का भ्रमण
फेस्टिवल के दूसरे दिन विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने सांभर, नालियासर और केवलादेव सहित विभिन्न वेटलैंड्स में 50 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया।

जयपुर बर्ड फेस्टिवल-2026 के दौरान सांभर साल्ट लेक में बग्गी ट्रेन के माध्यम से पक्षी अवलोकन करते विशेषज्ञ और प्रतिभागी।
जयपुर, 1 फरवरी। जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों का फील्ड विजिट कर प्रकृति और परिंदों से सीधा संवाद स्थापित किया। फेस्टिवल के अंतर्गत सांभर साल्ट लेक, नालियासर, बरखेड़ा–चंदलाई–मुहाना क्षेत्र, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), तालछापर अभयारण्य (चूरू) और मेनार जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड्स में बर्ड वॉचिंग गतिविधियां आयोजित की गईं।
आर्द्रभूमियों का भ्रमण और सहभागी विशेषज्ञ
रविवार को आयोजित इस फील्ड विजिट में निम्नलिखित प्रकृति प्रेमी और विशेषज्ञ शामिल हुए:
- पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप साह
- ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर, प्रतापसिंह चूंडावत
- पक्षी विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह बेड़सा, निर्मल मेनारिया
- बटरफ्लाई एक्सपर्ट मुकेश पंवार, पुष्पा खमेसरा
- शरद श्रीवास्तव, बाशोबी भटनागर सहित अनेक पर्यावरणविद्
सांभर झील: बग्गी ट्रेन से पक्षियों के संसार तक
प्रतिभागियों ने नालियासर और सांभर साल्ट लेक का भ्रमण किया। सांभर झील के मध्य क्षेत्र तक पहुंचने के लिए छोटी ट्रेननुमा ‘बग्गी’ का उपयोग किया गया, जहां स्थानीय गाइड के अनुसार झील क्षेत्र में 20 हजार से अधिक पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। विशाल झील में हजारों पक्षियों को एक साथ विचरण करते देख प्रतिभागी अभिभूत नजर आए।
वेटलैंड्स पर देखी गई पक्षियों की अद्भुत विविधता
फील्ड विजिट के दौरान सांभर और नालियासर वेटलैंड्स पर 50 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे गए, जिनमें शामिल हैं:
- पाइड एवोसेट, नॉर्णन शोवलर, पिंटेल, स्पूनबिल, रेडशैंक, सैंडपाइपर, कॉमन कूट, मूरहेन, लिटिल ग्रीब।
- ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, वुड सैंडपाइपर, ग्रीन सैंडपाइपर, स्पॉट-बिल्ड डक, नॉब-बिल्ड डक।
- गल, फ्लेमिंगो, ग्रे हेरॉन, रिवर टर्न, किंगफिशर, गैडवाल, डार्टर, लार्ज कॉरमोरेंट, पेलिकन।
- व्हीटिअर, स्टोनचैट, येलो वैगटेल, वैगटेल, क्रेस्टेड लार्क, व्हिस्कर्ड बुलबुल, बार्न स्वैलो, वायर-टेल्ड स्वैलो।
- प्लोवर, इंटरमीडिएट इग्रेट, रॉक चैट, रेड कॉलर्ड डव, ग्रेटर कूकाल, ड्रोंगो, व्हाइट-बेलीड ड्रोंगो।
- इंडियन रोलर, ग्रेलेग गूज, बार-हेडेड गूज, रुडी शेलडक, किंगफिशर (पाइड एवं व्हाइट-थ्रोटेड), कौआ और रॉक पिजन।
विशेषज्ञों ने बताया कि सांभर और नालियासर जैसी आर्द्रभूमियां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास हैं। हजारों पक्षियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यदि संरक्षण और संतुलित प्रबंधन किया जाए तो वेटलैंड्स जैव विविधता का मजबूत आधार बन सकते हैं। प्रतिभागियों ने पक्षियों के व्यवहार, भोजन, प्रवास और आवास संबंधी विशेषताओं को नजदीक से समझा।
राज्य स्तरीय कार्यशाला: रेप्टर्स, आउल और वेटलैंड्स संरक्षण
ग्रीन पीपल सोसायटी, जयपुर चैप्टर द्वारा राजस्थान सरकार के वन विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पक्षियों—विशेषकर रेप्टर्स और आउल—के संरक्षण के साथ-साथ देश और प्रदेश की आर्द्रभूमियों की चुनौतियों पर गहन विचार–विमर्श हुआ।
वेटलैंड्स पर पैनल डिस्कशन और विशेषज्ञों के विचार
- डॉ. असद रहमानी (पूर्व निदेशक, BNHS): "अमृत सरोवर योजना में मौजूद कुछ विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में वेटलैंड्स संकट की स्थिति में हैं और इनके संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास आवश्यक हैं।"
- राजपाल सिंह (सदस्य, राजस्थान वाइल्ड लाइफ बोर्ड): "अतिक्रमण, पानी की कमी और अनियमित पर्यटन गतिविधियां वेटलैंड्स के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।" उन्होंने सांभर लेक पर पर्यटन के दुष्प्रभावों की चर्चा की और उदयपुर के मेनार, किशन करेरी और बड़वई क्षेत्रों में ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना की।
- रवि सिंह (सीईओ, WWF इंडिया): "समाज में पॉजिटिव चेंज लाने की जरूरत है और बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजन इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।"
- अरुण प्रसाद (चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, KCA): उन्होंने सांभर लेक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, बर्ड फ्लू के समय किए गए संरक्षण प्रयासों और पर्यटन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।
पुस्तकों का विमोचन और वैज्ञानिक जानकारियां
कार्यशाला के दौरान रेप्टर्स एक्सपर्ट रातुल शाह की पुस्तक “Falcons of India” का विमोचन किया गया।
- रातुल शाह: बताया कि भारत में रेप्टर्स की कुल 108 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 60 से अधिक प्रजातियां राजस्थान में मौजूद हैं।
- डॉ. प्राची मेहता (आउल एक्सपर्ट): जानकारी दी कि विश्व में आउल की 240 प्रजातियां, जबकि भारत में 36 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि अंटार्कटिका को छोड़कर ये सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं और अधिकांश प्रजातियों में मादा आउल का आकार नर से बड़ा होता है।
- अनूप शाह (पद्मश्री फोटोग्राफर): उन्होंने फोटोग्राफी के व्यावहारिक टिप्स साझा किए और बताया कि फोटोग्राफी किस प्रकार संरक्षण का सशक्त माध्यम बन सकती है।
कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा ने किया। स्वागत उद्बोधन राहुल भटनागर ने दिया और अंत में संयोजक विक्रम सिंह ने आभार व्यक्त किया।
बॉलीवुड अभिनेता राहुल सिंह का संरक्षण संदेश
फिल्म दिल्ली बेली, कुर्बान और जॉनी गद्दार फेम अभिनेता राहुल सिंह ने फेस्टिवल में शिरकत की और युवाओं को प्रेरित किया।
राहुल सिंह ने कहा: "जयपुर बर्ड फेस्टिवल न केवल पक्षियों की विविधता को समझने का अवसर देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक चेतना भी विकसित करता है। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पक्षियों के लिए पानी रखना, पेड़ों का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना, भविष्य के लिए बहुत बड़ा योगदान साबित हो सकता है।"

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