जयपुर: पेपरलीक माफियाओं पर गरजी भजनलाल सरकार, पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगा हिलाया सियासी गलियारा
जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पेपरलीक कांड पर बड़ा हमला बोलते हुए कांग्रेस सरकार पर साढे़ चार साल तक फर्जीवाड़ा दबाने का आरोप लगाया। एसओजी की निष्पक्ष जांच और जीरो टॉलरेंस नीति के साथ सरकार ने युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प दोहराया है। जानिए कैसे 2019 के इस पुराने मामले ने अब राजस्थान की सियासत में तूफान ला दिया है।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार और पेपरलीक के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब एक नया और आक्रामक मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सांगानेर स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान न केवल पेपरलीक माफियाओं को कड़ा संदेश दिया, बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब सीधे उन लोगों पर प्रहार कर रही है जिन्होंने व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों के सपनों को कुचला है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्तियों में हुई धांधली का उल्लेख करते हुए सनसनीखेज खुलासा किया कि हाल ही में पकड़े गए लोगों ने यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2019 में कांग्रेस शासन के दौरान किया था। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का यह खेल वर्षों से चल रहा था, लेकिन पिछली सरकार ने इसे रोकने के बजाय इस पर पर्दा डालने का काम किया। मुख्यमंत्री ने साझा किया कि एक प्रकरण में तो उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने भी पूर्ववर्ती सरकार को आगाह करते हुए ठोस सूचनाएं साझा की थीं, लेकिन उस समय की सरकार साढे़ चार साल तक इन फाइलों को दबाए बैठी रही। आज वही लोग नैतिकता की दुहाई दे रहे हैं, जबकि उनकी चुप्पी ने पेपरलीक माफियाओं के हौसले बुलंद किए थे।
कानूनी कार्रवाई की निष्पक्षता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को दिए गए निर्देश किसी राजनीतिक प्रतिशोध या विशेष कालखंड के लिए नहीं हैं। एसओजी की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और ठोस साक्ष्यों पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य भर्तियों में पवित्रता सुनिश्चित करना और युवाओं के विश्वास को बहाल करना है। इस कड़े रुख ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में खलबली मचा दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में एसओजी का शिकंजा कई और बड़े चेहरों पर कस सकता है।

Pratahkal Bureau
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