जयपुर: कड़ाके की ठंड में गठिया के दर्द ने बढ़ाई मुसीबत, विशेषज्ञों ने बताया राहत पाने का सटीक फॉर्मूला
जयपुर के विशेषज्ञ डॉ. अखिल गोयल ने बताया कि सर्दियों में गठिया का दर्द 30% तक क्यों बढ़ जाता है। जानिए रक्त संचार, विटामिन-D की कमी और वायुदाब के प्रभाव से जुड़ी वैज्ञानिक वजहें और जोड़ों की अकड़न से बचने के प्रभावी उपाय। ठंड में घुटनों और मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने के लिए पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट।

जयपुर। गुलाबी नगरी सहित पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी का सितम शुरू होते ही अस्पतालों के ओपीडी में जोड़ों के दर्द और असहज अकड़न से जूझते मरीजों की कतारें लंबी होने लगी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाले आंकड़े की ओर इशारा करते हुए बताया है कि पारा गिरते ही गठिया और मांसपेशियों के दर्द के मामलों में लगभग तीस प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गई है जो पहले से ही रूमेटाइड अर्थराइटिस या ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं। सर्दियों की यह मार केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि कम शारीरिक सक्रियता के कारण युवाओं में भी जोड़ों की जकड़न एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है।
मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर में कार्यरत कंसल्टेंट – क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी डॉ. अखिल गोयल इस मौसमी बदलाव और जोड़ों के स्वास्थ्य के बीच के वैज्ञानिक संबंध पर गहराई से प्रकाश डालते हैं। डॉ. अखिल गोयल के अनुसार, सर्दियों में जोड़ों के दर्द के बढ़ने के पीछे कई जटिल जैविक और पर्यावरणीय कारक उत्तरदायी होते हैं। ठंड के मौसम में हमारी रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे जोड़ों तक होने वाला गर्म रक्त का संचार बाधित होता है और परिणामस्वरूप घुटनों व हाथों-पैरों में असहनीय अकड़न महसूस होती है। इसके साथ ही, वायुमंडलीय दबाव यानी बैरोमेट्रिक प्रेशर में आने वाली गिरावट जोड़ों के आसपास के ऊतकों में फैलाव पैदा करती है, जो दर्द की संवेदनशीलता को और अधिक बढ़ा देती है।
जोड़ों के भीतर मौजूद चिकनाई, जिसे सिनोवियल द्रव कहा जाता है, वह कम तापमान में गाढ़ा होने लगता है, जिससे जोड़ों का लचीलापन कम हो जाता है। डॉ. अखिल गोयल यह भी बताते हैं कि सर्दियों में लोग धूप का पर्याप्त सेवन नहीं कर पाते, जिससे शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है और यह हड्डियों की मजबूती को सीधा प्रभावित करती है। शारीरिक गतिविधियों में कमी और मांसपेशियों की सख्ती इस समस्या को और भी जटिल बना देती है। हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि सर्दी स्वयं गठिया पैदा नहीं करती, बल्कि यह सुप्त अवस्था में पड़े दर्द को उग्र करने का काम करती है।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ बचाव को ही सबसे बड़ा उपचार मानते हैं। जोड़ों को गर्माहट देने के लिए थर्मल वियर, दस्ताने और गर्म पट्टियों का उपयोग अनिवार्य है, जबकि नियमित रूप से हल्का व्यायाम और योग जोड़ों की सक्रियता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खान-पान में ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थों का समावेश प्राकृतिक रूप से सूजन को कम करता है। यदि सावधानियों के बाद भी दर्द अनियंत्रित रहता है, तो हीट थेरेपी और रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह पर दी गई दवाओं का सेवन ही एकमात्र विकल्प बचता है। सर्दियों के इस चुनौतीपूर्ण दौर में संयमित जीवनशैली और डॉक्टरी परामर्श के तालमेल से ही जोड़ों के इस 'कोल्ड अटैक' से सुरक्षित रहा जा सकता है।

Pratahkal Bureau
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