जयपुर आर्ट वीक में पारंपरिक मोजरी कला और आर्ट थेरेपी का संगम
जयपुर आर्ट वीक में 'अंधा युग' प्रदर्शनी की अवधि 15 फरवरी तक बढ़ाई गई और मोजरी पेंटिंग सहित आर्ट थेरेपी कार्यशालाओं में प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई।

जयपुर के जवाहर कला केंद्र और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित जयपुर आर्ट वीक के दौरान विभिन्न कार्यशालाओं में कला के माध्यम से आत्म-अभिव्यक्ति करते प्रतिभागी।
‘पेंट योर ओन मोजरी’ कार्यशाला
- पाटी मुख्यालय से आयोजित ‘पेंट योर ओन मोजरी’ कार्यशाला ने प्रतिभागियों को राजस्थान की पारंपरिक मोजरी कला से रूबरू कराया।
- इस सत्र में प्रतिभागियों ने डीआयवाय किट के माध्यम से अपनी पसंद के रंग और डिज़ाइन से वेगन मोजरी तैयार की।
- कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक हस्तकला को नैतिक और सतत दृष्टिकोण के साथ अपनाने को प्रोत्साहित करना रहा।
- सत्र का संचालन काइंड सोल द्वारा किया गया और अंत में प्रतिभागी अपने हाथों से बनाई गई पहनने योग्य मोजरी को एक सांस्कृतिक स्मृति के रूप में साथ ले गए।
जवाहर कला केंद्र: ‘अंधा युग’ प्रदर्शनी की अवधि बढ़ी
जवाहर कला केंद्र में आयोजित ‘अंधा युग’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी, जिसे वरिष्ठ कलाकार अनीता दुबे ने क्यूरेट किया है, अब 15 फ़रवरी तक दर्शकों और आर्ट लवर्स के लिए खुली रहेगी। इस प्रदर्शनी को दर्शकों से मिल रहे भरपूर प्रेम और रुचि को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ाई गई है।
प्रदर्शनी की मुख्य विशेषताएं:
- प्रदर्शनी में देश-विदेश के 50 कलाकारों द्वारा क्यूरेट की गई इंस्टॉलेशन प्रस्तुत की गई हैं।
- ये इंस्टॉलेशन समकालीन कला के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय सरोकारों पर संवाद स्थापित करती हैं।
- कला प्रेमियों के बीच यह प्रदर्शनी जयपुर आर्ट वीक की प्रमुख आकर्षण बनकर उभरी है।
‘नवी पुरानी हथाई’ और सामूहिक संवाद
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में ड्रॉप-इन गतिविधि ‘नवी पुरानी हथाई’ आयोजित की गई। इस सत्र में पारंपरिक हथाई की अवधारणा को नए संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को व्यक्तिगत स्मृतियों, शहरी बदलाव और रोज़मर्रा के अनुष्ठानों से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर दिया गया। संवाद के माध्यम से शहर की सामूहिक पहचान पर चिंतन किया गया। यह कार्यक्रम बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लिए खुला रहा।
आर्ट थेरेपी: रिदमिक सेल्फ-पोर्ट्रैचर
शाम को जेकेके स्थित सुकृति गैलरी में ‘बाइलेटरल ड्रॉइंग: रिदमिक सेल्फ-पोर्ट्रैचर इन फ्लक्स’ कार्यशाला आयोजित की गई। कलाकार एवं मनोवैज्ञानिक शगुन अग्रवाल द्वारा संचालित इस सत्र में समकालीन कला अभ्यास और आर्ट थेरेपी का मेल देखने को मिला।
"बड़े कैनवास पर द्विपक्षीय ड्रॉइंग के ज़रिए प्रतिभागियों ने गति, लय के माध्यम से अपनी अंदर की भावनाओं को अभिव्यक्त किया। यह प्रक्रिया प्रतिनिधित्व से अधिक अनुभव पर केंद्रित रही, जिसमें नियंत्रण और समर्पण जैसे भावों की खोज की गई।"

Pratahkal Bureau
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