जयपुर। राजस्थान की प्यासी धरती के भाग्य और भविष्य को बदलने के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में 'राम जलसेतु लिंक परियोजना' अब मिशन मोड पर आ चुकी है। प्रदेश को जल आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाली यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में खुशहाली का नया संचार करने के लिए तैयार है। इस महापरियोजना के केंद्र में चम्बल नदी पर निर्मित होने वाला 2.3 किलोमीटर लंबा विशाल एक्वाडक्ट है, जिसे राज्य की जल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। 2 हजार 330 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहा यह ढांचा जून 2028 तक पूरी तरह तैयार होकर प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखेगा।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के अटूट संकल्प का ही परिणाम है कि इस परियोजना के प्रथम चरण के दूसरे पैकेज का कार्य अत्यधिक तीव्र गति से संचालित हो रहा है। यह अनूठा चम्बल एक्वाडक्ट कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव को बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव से जोड़ेगा। तकनीकी रूप से यह परियोजना अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण है, जिसके तहत कालीसिंध नदी पर स्थित नवनेरा बैराज से पानी को विशाल पंप हाउस के माध्यम से लिफ्ट कर मेज नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इसके उपरांत, मैज बैराज से यह जल फीडर के जरिए गलवा बांध तक और अंततः बीसलपुर एवं ईसरदा जैसे जीवनदायी बांधों तक पहुंचेगा। यह एक्वाडक्ट न केवल पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन का एक सुगम और नया वैकल्पिक मार्ग भी प्रदान करेगा।





निर्माण की बारीकियों पर गौर करें तो 2280 मीटर लंबे इस एक्वाडक्ट की आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर रखी गई है। मई 2025 में कार्य का औपचारिक शुभारंभ होने के बाद से ही यहां 12 अत्याधुनिक रिग मशीनों की सहायता से दिन-रात काम चल रहा है। वर्तमान में साइट पर कैंप और बैचिंग प्लांट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है। कुल प्रस्तावित 5060 वर्किंग पाइल में से 860 का निर्माण पूरा कर लिया गया है, और प्रतिदिन औसतन 500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट कार्य के साथ परियोजना को समय सीमा से पूर्व पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के मोर्चे पर यह परियोजना मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी है। सरकार गठन के तुरंत बाद उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर दशकों से लंबित विवादों को सुलझाया। जनवरी 2024 में संशोधित पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चम्बल) योजना के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और 17 दिसंबर 2024 को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में जयपुर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच ऐतिहासिक एमओए का आदान-प्रदान हुआ। 90 हजार करोड़ रुपये की इस वृहद परियोजना से राजस्थान के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी की प्यास बुझेगी और सिंचाई के साथ-साथ औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व पंख लगेंगे। यह परियोजना महज एक निर्माण नहीं, बल्कि राजस्थान को जल संकट से स्थायी मुक्ति दिलाने का श्री भजनलाल शर्मा का एक पवित्र संकल्प है।

Pratahkal Bureau

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