जयपुर: श्री अमरापुर स्थान पर 40 कुंडीय महायज्ञ में 108 जोड़ों ने दी आहुति, गूंजे वैदिक मंत्र
जयपुर के श्री अमरापुर स्थान पर आयोजित भव्य 40 कुंडीय महायज्ञ में 108 जोड़ों ने विश्व कल्याण के लिए दी आहुतियां। चालीहा महोत्सव के विशेष महत्व और आने वाले 84वें बरसी उत्सव की तैयारियों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट।

जयपुर के श्री अमरापुर स्थान पर चालीहा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित 40 कुंडीय महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व कल्याण की प्रार्थना की।
जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान पर युगपुरुष आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के पावन चालीहा महोत्सव के उपलक्ष्य में शनिवार को एक भव्य 40 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में 108 जोड़ों ने सम्मिलित होकर विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ सामूहिक आहुतियां दीं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 11 संतों का सानिध्य और 11 विद्वान पंडितों द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया यज्ञ रहा, जो करीब 40 मिनट तक चला।
पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने चालीहा उत्सव में संख्या 40 के विशेष महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चालीहा का अर्थ 40 दिनों तक चलने वाला महोत्सव है। इसमें नाम जप, हवन, व्रत उपासना और परोपकार जैसी साधनाएं विशेष फलदायी होती हैं। उन्होंने आचार्य श्री के जन्म के पीछे की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी माता कृष्ण देवी ने 40 दिन की विशेष व्रत उपासना के उपरांत ही उन्हें पुत्र रूप में प्राप्त किया था।
यज्ञ अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार से उत्पन्न ध्वनि तरंगों और औषधीय सुगंध ने वातावरण को आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रूप से शुद्ध कर दिया। संतों ने बताया कि प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों द्वारा मौसम के अनुकूल परिवर्तन और मनोकामना पूर्ति के लिए यज्ञ किए जाते रहे हैं। शनिवार को अनुष्ठान के दौरान इंद्र देव की उपस्थिति भी श्रद्धालुओं के लिए चर्चा का विषय रही। सुबह छह बजे से शुरू हुए इस महायज्ञ के दौरान हल्की वर्षा ने मानो स्वयं अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अनुष्ठान की सफलता पर आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर स्वामी मनोहर लाल जी महाराज, संत मोहन लाल जी महाराज सहित अनेक संत और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। श्री अमरापुर स्थान प्रबंधन ने जानकारी दी कि सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का 84वां बरसी उत्सव आगामी 16 जून से 20 जून तक भक्तिमय वातावरण में मनाया जाएगा। इस दौरान प्रेम प्रकाश ग्रंथ गीता जी के पाठ, सत्संग, सामूहिक चालीसा पाठ और कुष्ठ आश्रम में भोजन सेवा जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्सव का समापन 20 जून को विशाल भंडारे के साथ होगा।

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