जयपुर: अम्बेडकर जयंती पर 100 कमरों के बालिका छात्रावास की घोषणा
डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित चार दिवसीय विचार क्रांति महोत्सव के समापन पर छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण का बड़ा निर्णय लिया गया।

संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में जयपुर में आयोजित चार दिवसीय 'अम्बेडकर-फुले विचार क्रांति महोत्सव 2026' का भव्य समापन हुआ। डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी राजस्थान द्वारा आयोजित इस गरिमामयी महोत्सव के अंतिम दिन समाज को सशक्त बनाने की दिशा में सौ कमरों के बालिका छात्रावास के निर्माण की महत्वपूर्ण योजना साझा की गई, जिसके अंतर्गत प्रथम चरण में पचास कमरों के निर्माण की आधिकारिक घोषणा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात पूरा परिसर जय भीम के नारों से गुंजायमान हो उठा।
सोसायटी के अध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब की 135वीं जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाई जा रही है और इस चार दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य उनके दिखाए मार्ग पर गहन चिंतन एवं मंथन करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृशक्ति को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ ही इस छात्रावास परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है। सुनील नारनौलिया के कुशल मंच संचालन में आयोजित इस समारोह का मुख्य आकर्षण नारी शक्ति का पैदल मार्च रहा। महिलाओं ने एक विशाल रैली के रूप में परिसर में मार्च निकाला और बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया, जिसकी उपस्थित जनसमूह ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
विचार क्रांति महोत्सव के दौरान न्यायिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार साझा किए। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री गणेश राम मीणा ने अपने संबोधन में बाबा साहब के मूल मंत्र 'शिक्षित बनो और संगठित रहो' पर जोर देते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। पूर्व मंत्री श्री बाबूलाल नागर, श्री हनुमान प्रसाद, श्री दयानंद सक्करवाल, डॉ. चेतराम रायपुरिया, श्री कन्हैया लाल बैरवा, श्री जेपी विमल, श्री बीएल आर्य, श्री राम चौरड़िया, श्री सत्यवीर सिंह और श्री आरपी बैरवा सहित अन्य वक्ताओं ने भी समानता का संदेश प्रेषित किया। वक्ताओं ने इस बात की आवश्यकता पर बल दिया कि बाबा साहब के विचारों और उनकी कालजयी रचनाओं पर और अधिक शोध किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों और समाज को सही दिशा प्राप्त हो सके।
महोत्सव के समापन अवसर पर हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जहां विभिन्न क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। चार दिनों तक चले इस मंथन कार्यक्रम में शिक्षा, आरक्षण और नारी सशक्तिकरण जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई। मंगलवार की शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में युवाओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। इस गौरवशाली अवसर पर प्रोमिया रायपुरिया, कांता सिंह, संतोष दायमा, प्रीति मोर्य, राजू सांभरिया, राधेश्याम बलाई, सरदार सिंह बैरवा, मुकेश वर्मा, जयनारायण शेर, अजय डागर, विनोद रालावता और राजेश नागौरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यह महोत्सव न केवल विचारों का संगम रहा, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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