जयपुर, 10 अक्टूबर 2026। आदर्श नगर स्थित श्री राम मंदिर में सर्वपितृ अमावस्या पर देव, ऋषि और पितृ तर्पण का आयोजन कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की गई। पंडित बनवारी लाल शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण के साथ हवन किया गया, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय के श्लोकों की आहुतियां अर्पित की गईं।

मंदिर अध्यक्ष हरचरण लेकर ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ पूजा-अर्चना और संकल्प के साथ हुआ। इसके बाद गणेश पूजन, दीप पूजन, कलश पूजन, नवग्रह पूजन और षोडश मातृ पूजन किया गया। अनुष्ठान के प्रधान देवता भगवान विष्णु का पूजन भी विधि-विधान से संपन्न हुआ।

मंदिर सचिव अनिल खुराना ने बताया कि देव तर्पण के माध्यम से देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। ऋषि तर्पण में वैदिक ज्ञान और धर्म परंपराओं का संरक्षण करने वाले ऋषियों का स्मरण किया गया। वहीं, पितृ तर्पण के दौरान दिवंगत पूर्वजों को जल, दूध, तिल और जौ अर्पित कर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि तथा पूर्वजों के आशीर्वाद की कामना की गई।

अनुष्ठान के दौरान सभी विद्वानों ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण पाठ किया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने अपने-अपने पूर्वजों के प्रति आस्था प्रकट की। तुलसी संगतानी, बाबू लाल गुरनानी, तिलक राज खुराना, जितेंद्र चड्डा, अमर लाल लखानी, दर्शन मलिक, कृष्ण कुमार भाटिया और जितेंद्र सैनी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने गीता के सातवें अध्याय के श्लोकों की आहुतियां यज्ञ में अर्पित कीं।

हिंदू धर्म परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष की इस अमावस्या को उन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करने का अवसर माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाता। इस दिन पितरों का स्मरण कर उन्हें तर्पण अर्पित किया जाता है।

श्री राम मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से परंपराओं के निर्वहन के साथ नई पीढ़ी को पितृ स्मरण, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व से जोड़ने का संदेश दिया गया।

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