जयपुर के आदर्श नगर स्थित श्री राम मंदिर में चल रही श्री रामलीला में पुष्प वाटिका, गिरिजा पूजन, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्री राम-जानकी विवाह की लीलाओं का मंचन किया गया। प्रभु श्री राम और माता सीता के प्रथम दर्शन से लेकर शिव धनुष भंग होने तक की लीला ने दर्शकों के सामने रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत किया।

14 अक्टूबर, 2026 को आयोजित लीला में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण पूजा के लिए पुष्प लेने पुष्प वाटिका पहुंचे। वहां सुंदर बगीचे और सरोवर देखकर भगवान हर्षित हुए। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ गिरिजा पूजन के लिए वहां पहुंचीं। सीता जी ने लताओं की ओट से प्रभु श्री राम को देखा और माता गिरिजा के मंदिर में जाकर प्रार्थना की कि उन्हें श्री रामचंद्र जी ही पति के रूप में प्राप्त हों।

इस प्रसंग में माता गौरी ने सीता जी को आशीर्वाद देते हुए कहा, “मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो।।” इसका अर्थ है कि जिस वर के प्रति उनका मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभाव से सुंदर सांवले श्री रामचंद्र उन्हें पति के रूप में प्राप्त होंगे। वे दया के भंडार और सुजान हैं तथा उनके शील और स्नेह को जानते हैं। माता गौरी से ऐसा आशीर्वाद पाकर सीता जी हर्षित हुईं।

इसके बाद मिथिला नगरी में आयोजित सीता स्वयंवर की लीला का मंचन हुआ। जनक नंदिनी सीता जी के स्वयंवर में कई स्थानों के राजा-महाराजा पहुंचे थे। स्वयंवर की शर्त भगवान शिव के धनुष पिनाक को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाना था। कई पराक्रमी राजाओं और वीरों ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई उसे हिला तक नहीं सका।

इसी बीच अयोध्या के राजकुमार प्रभु श्री राम गुरु विश्वामित्र के साथ जनक दरबार पहुंचे। गुरु की आज्ञा के अनुसार श्री राम ने सहज भाव से दिव्य शिव धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। इसी दौरान धनुष भंग हो गया। इसके साथ ही पूरा सभा मंडप जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का मंचन किया गया।

श्री राम मंदिर के सचिव अनिल खुराना ने बताया कि गुरुवार को श्री रामलीला में मंथरा-कैकई संवाद, दशरथ-कैकई संवाद, कौशल्या-श्री राम संवाद और श्री राम वन गमन की लीला का मंचन होगा। आगामी मंचन में रामकथा के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा।

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