जयपुर। जब हृदय में राष्ट्रभक्ति का ज्वार उमड़ता है, तो शब्द और स्वर सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं। गुलाबी नगरी जयपुर के अकादमी संकुल परिसर में शुक्रवार को एक ऐसा ही भावुक और गौरवशाली दृश्य जीवंत हो उठा, जहाँ सुरों की सरिता और देशभक्ति का जज्बा एक साथ मिल गए। राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' के सृजन के ऐतिहासिक 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवमयी उपलक्ष्य और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाषचन्द बोस की जयंती के पावन अवसर पर राजस्थान संस्कृत अकादमी एवं राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 'वन्दे मातरम @150' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। 23 जनवरी, 2026 की यह दोपहर केवल एक आयोजन भर नहीं थी, बल्कि यह उन विशेष बच्चों के सामर्थ्य और उल्लास का उत्सव बन गई, जिन्होंने अपनी मुस्कान से समूचे परिसर को राष्ट्रप्रेम के रंग में सराबोर कर दिया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम की सबसे हृदयस्पर्शी झलक तब देखने को मिली जब प्रयास वोकेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मेंटली हैंडीकैप्ड (Prayas Vocational Institute for Mentally Handicapped) के दिव्यांग बालक-बालिकाओं ने पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को दरकिनार कर, इन नन्हे राष्ट्रभक्तों ने जब अपने कोमल हाथों में तिरंगा लहराया, तो मानों आकाश भी उनकी जिजीविषा को नमन करने लगा। मंत्रमुग्ध कर देने वाले इस परिवेश में जब इन बच्चों ने समवेत स्वर में 'वन्दे मातरम्' का गायन शुरू किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आँखें गर्व और संवेदना से नम हो उठीं। उनकी आवाज़ में छिपी निष्कपट राष्ट्रभक्ति ने यह सिद्ध कर दिया कि देशप्रेम व्यक्त करने के लिए केवल स्वर नहीं, बल्कि शुद्ध भाव की आवश्यकता होती है।

कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में दोनों अकादमियों का समन्वय अनुकरणीय रहा, जहाँ सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सरोकारों का संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान अकादमी संकुल परिसर में जनभागीदारी का उत्साह भी चरम पर रहा। स्कूल के नन्हे विद्यार्थियों से लेकर संस्थान के समर्पित कार्मिकों तक, लगभग 60 से 70 लोगों ने इस सामूहिक राष्ट्रगान और ध्वज वंदन में अपनी सहभागिता निभाई। जन-जन के कंठ से फूटता वन्दे मातरम् का उद्घोष न केवल नेताजी की विरासत को याद कर रहा था, बल्कि भावी पीढ़ी के मन में राष्ट्रीयता के बीज भी बो रहा था।

यह आयोजन इस दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा कि इसने समाज के वंचित और विशेष वर्ग को मुख्यधारा के राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के प्रति सेवा और समर्पण के संकल्प के साथ हुआ। 'वन्दे मातरम @150' ने जयपुर की धरती से यह संदेश प्रसारित किया कि राष्ट्रगीत की धुन आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है, जितनी डेढ़ शताब्दी पूर्व थी, और यह हर भारतीय के हृदय की धड़कन बनकर गूँजती रहेगी।

Pratahkal Bureau

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