जयपुर: जनजाति गौरव और अंत्योदय का संकल्प, मुख्यमंत्री ने बजट पूर्व चर्चा में कोरी विकास की नई इबारत
जयपुर में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने जनजाति विकास के हितधारकों के साथ बजट पूर्व चर्चा की। जनजाति संस्कृति को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए मुख्यमंत्री ने ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट, पीएम-जनमन अभियान और जनजाति विकास कोष में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण कदमों के जरिए आदिवासी समाज के सर्वांगीण उत्थान और अंत्योदय के संकल्प को दोहराया।

जयपुर। राजस्थान की पावन धरा पर जनजाति संस्कृति न केवल एक गौरवशाली इतिहास है, बल्कि यह हमारे समाज की वह अनमोल धरोहर है जिसे सहेजना और समृद्ध करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित 'बजट पूर्व चर्चा' के दौरान इस भावना को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया। जनजाति विकास के हितधारकों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होगा, बल्कि इसमें जनजाति समाज के समग्र उत्थान और उनकी चुनौतियों के समाधान का वास्तविक प्रतिबिंब दिखाई देगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'अंत्योदय' संकल्प को आत्मसात् करते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही शासन का मूल मंत्र है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति क्षेत्र की परंपराओं और वैभव को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार 'ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट' के माध्यम से पर्यटन को नए पंख लगा रही है। बेणेश्वर धाम और मानगढ़ धाम जैसे पवित्र स्थलों को इस सर्किट के तहत विकसित किया जा रहा है, ताकि सोम, माही और जाखम नदी के संगम पर आयोजित होने वाले भव्य आदिवासी मेलों के जरिए नई पीढ़ी अपने समृद्ध इतिहास से रूबरू हो सके। उन्होंने विशेष रूप से राजीविका की महिलाओं द्वारा तैयार की गई गुलाल की खरीद का जिक्र करते हुए इसे आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि 'पीएम-जनमन' और 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' ने आदिवासी समाज को एक नई वैश्विक पहचान दी है। बारां जिले में हजारों आवासों, विद्युत कनेक्शनों और पेयजल सुविधाओं का सफलतापूर्वक पूरा होना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है।
राज्य सरकार ने जनजाति विकास कोष को 1000 करोड़ से बढ़ाकर 1750 करोड़ रुपये कर अपनी मंशा साफ कर दी है। डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर में बन रहे स्मारक और वीर बालिका कालीबाई संग्रहालय हमारे नायकों के प्रति कृतज्ञता के प्रतीक हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी गई है, जिसमें नए आश्रम छात्रावास, आवासीय विद्यालय और 240 नए मां-बाड़ी केंद्रों की स्वीकृति शामिल है। इस महत्वपूर्ण बैठक में उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, सलूंबर, बारां और सिरोही जैसे जिलों से आए हितधारकों ने शिक्षा, सिंचाई और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर अपने सुझाव रखे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने गंभीरता से सुना।
इस उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान मंच पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही प्रशासनिक तंत्र के प्रमुख स्तंभों के रूप में अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन श्री अभय कुमार, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अखिल अरोड़ा, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुंजी लाल मीणा और प्रमुख शासन सचिव वित्त श्री वैभव गालरिया ने भी मंथन में भाग लिया। यह बैठक इस विश्वास के साथ संपन्न हुई कि आने वाला बजट राजस्थान के जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए सर्वांगीण प्रगति और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगा।

Pratahkal Bureau
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