उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर स्थापना के 300वें वर्ष के उपलक्ष्य में प्रदेश के पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

राजस्थान की पर्यटन एवं कला संस्कृति को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को जयपुर स्थित पर्यटन भवन में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विभागीय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने जयपुर स्थापना के आगामी 300 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले उत्सवों को प्रदेश की विरासत को वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग करने का एक स्वर्णिम अवसर बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन उत्सवों को राज्य के शौर्य, आस्था, समृद्ध विरासत और अनूठी कला-संस्कृति से जोड़कर एक ऐसे स्वरूप में तैयार किया जाए, जो राजस्थान को एक ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में मजबूती से स्थापित कर सके।

समीक्षा बैठक के दौरान पर्यटन क्षेत्र को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर मंथन किया गया। उपमुख्यमंत्री ने जवाहर कला केन्द्र और शिल्पग्राम को विश्वस्तरीय कला एवं सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर चर्चा की, साथ ही रवींद्र मंच के उन्नयन को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जैसलमेर स्थित तनोट माता मंदिर परिसर के विकास के लिए बीएसएफ के साथ समन्वय स्थापित करने, पुष्कर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और आमेर के लाइट एंड साउंड शो जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, मीडिया कैंपेन के लिए मीडिया बाइंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिज्म ऐप के विकास पर भी बल दिया गया।

बैठक में उपस्थित विभागीय अधिकारियों ने महाराणा प्रताप सर्किट, अंतर्राष्ट्रीय प्रचार प्रसार, वॉल्ड सिटी में प्रस्तावित म्यूजियम, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम का नवीनीकरण, आमेर मास्टरप्लान और झुंझुनू वॉर म्यूजियम सहित कई अन्य परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया। इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यटन विभाग से जुड़ी सभी विकास परियोजनाएं एक निश्चित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण की जानी चाहिए ताकि प्रदेश को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।

यह बैठक राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में संवारने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जिस प्रकार जयपुर के 300वें स्थापना दिवस को आधार बनाकर राज्य की हेरिटेज ब्रांडिंग की रणनीति बनाई जा रही है, वह निश्चित रूप से न केवल पर्यटन के क्षेत्र में नए द्वार खोलेगी, बल्कि राजस्थान की गौरवमयी गाथा को संपूर्ण विश्व में एक नए गौरव के साथ स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।A

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