जयपुर में गूँजा 'जय जोहार': आदिवासी युवाओं के सपनों को 'माय भारत' ने दी नई उड़ान, सांसद मंजू शर्मा ने दिया राष्ट्र निर्माण का मंत्र
जयपुर के एमिटी विश्वविद्यालय में 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। सांसद मंजू शर्मा ने युवाओं को 'माय भारत' पोर्टल और सरकारी योजनाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस सात दिवसीय आयोजन में 200 आदिवासी युवा जयपुर की विरासत और आधुनिकता से रूबरू होंगे।

जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के प्रांगण में शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक संगम का एक अद्भुत दृश्य जीवंत हो उठा। अवसर था गृह मंत्रालय के सौजन्य से 'माय भारत', युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के भव्य शुभारंभ का। दीप प्रज्ज्वलन और भगवान बिरसा मुंडा व स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ जब इस सात दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ, तो हवाओं में आदिवासी अंचलों की अदम्य जिजीविषा और भविष्य के भारत की सुनहरी तस्वीर साफ दिखाई देने लगी। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने समारोह को संबोधित करते हुए आदिवासी युवाओं को देश की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से अब सुदूर वनांचलों के युवा हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।
सांसद मंजू शर्मा ने 'सबका साथ-सबका विकास' की अवधारणा पर बल देते हुए युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और स्वदेशी को जीवन का आधार बनाने की अपील की। उन्होंने 'माय भारत' पोर्टल को अवसरों का द्वार बताते हुए कहा कि "जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है।" उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे यहाँ से सीखने की प्रवृत्ति लेकर जाएँ और अपने समाज को राष्ट्र निर्माण की गौरवशाली यात्रा में सहभागी बनाएँ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अमित जैन ने आधुनिकता और परंपरा के सामंजस्य को विकास की कुंजी बताया। वहीं, 'माय भारत' राजस्थान के राज्य निदेशक कृष्ण लाल ने "जय जोहार" के जोशीले उद्घोष के साथ युवाओं का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जयपुर इन सात दिनों तक इन युवाओं को एक आत्मीय पारिवारिक वातावरण प्रदान करेगा, साथ ही उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों और वहाँ की सांस्कृतिक समृद्धता पर भी प्रकाश डाला।
इस गरिमामयी मंच पर जब विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने अपनी आपबीती साझा की, तो समूचा सभागार भावुक हो उठा। ओडिशा की प्रेमिका नाग ने अपनी 'छत्रज यात्रा' के अनुभव साझा किए, वहीं दंतेवाड़ा की हर्षिता मकाम ने बताया कि कैसे सरकार की पहलों ने उन्हें भय के माहौल से निकालकर देश को देखने और समझने का हौसला दिया। छत्तीसगढ़ के युवाओं ने बस्तर की बदलती तस्वीर और अपनी पारंपरिक 'लाल चींटी की चटनी' (चापड़ा) के औषधीय गुणों से सबको परिचित कराया। अरिंदर सूर्य की दास्ताँ ने सबको प्रभावित किया, जिन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं के सहारे ही वे अपनी शिक्षा पूरी कर पाए और पहली बार रेल यात्रा कर इस ऐतिहासिक मंच तक पहुँचे।
समारोह की शाम उस समय और भी जीवंत हो गई जब सुकमा जिले के दल ने अपने पारंपरिक लोक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस सात दिवसीय कार्यक्रम में ओडिशा के कंधमाल व कालाहांडी, झारखंड के सिंहभूम पश्चिम, मध्यप्रदेश के बालाघाट, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ के कांकेर, दंतेवाड़ा व सुकमा जैसे दुर्गम जिलों के 200 होनहार युवा भाग ले रहे हैं। आगामी दिनों में ये प्रतिभागी जयपुर की ऐतिहासिक विरासतों और औद्योगिक इकाइयों का भ्रमण करेंगे, साथ ही चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के जरिए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। इस अवसर पर गृह मंत्रालय के सहायक अनुभाग अधिकारी भूपेश यादव, जयपुर, बारां व झुंझुनूं के जिला युवा अधिकारी, एमिटी विश्वविद्यालय के नितिन भारद्वाज, मनोज कुमार और रिटायर्ड ब्रिगेडियर गोविंद सिंह राठौड़ सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। यह आयोजन केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि भारत की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त सेतु बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau
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