ब्यावर में अंतरराष्ट्रीय वैचारिक संगम: सामाजिक न्याय मंत्री ने किया शोध स्मारिका का भव्य विमोचन
ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित 31वीं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने शोध स्मारिका का विमोचन किया। 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान परंपरा' पर आधारित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। जानें इस भव्य बौद्धिक समागम और सम्मानित विभूतियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट।

ब्यावर। राजस्थान के ऐतिहासिक शहर ब्यावर में वैचारिक मंथन और बौद्धिक विमर्श का एक नया अध्याय लिखा गया, जब सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग और राजस्थान समाजशास्त्रीय परिषद के संयुक्त तत्वावधान में 31वीं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शानदार आगाज हुआ। शुक्रवार को आयोजित इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में पधारे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने मां शारदा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजन के केंद्र में 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सतत विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा' जैसे गंभीर विषय रहे, जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में गहराई से खंगाला गया।
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उद्घाटन सत्र में विधायक शंकर सिंह रावत, राजस्थान समाजशास्त्रीय परिषद के अध्यक्ष प्रो. सुशील कुमार त्यागी एवं सचिव प्रो. सुबोध कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर शोभायमान थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य और संरक्षक डॉ. रेखा मंडोवरा ने की। संगीत विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शारदा वंदना के मधुर स्वरों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। आयोजन के दौरान अतिथियों का राजस्थानी परंपरा के अनुरूप फूल मालाओं, उपरणा, साफा और स्मृति चिन्ह भेंट कर भावपूर्ण स्वागत किया गया।
इस सेमिनार का सबसे महत्वपूर्ण क्षण 'शोध आलेख स्मारिका' का विमोचन रहा, जो शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी। इसी कड़ी में शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. नरोत्तम जयपाल और प्रो. सुरेश चंद राजौरा को उनकी अद्वितीय सेवाओं के लिए 'आजीवन उपलब्धि पुरस्कार' (Life-time Achievement Award) से सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति प्रो. केएल शर्मा ने आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय ज्ञान के मेल पर एक सारगर्भित व्याख्यान दिया, जिसने उपस्थित शोधार्थियों को सोचने पर विवश कर दिया।
सेमिनार के सफल आयोजन में समन्वयक डॉ. दुष्यंत पारीक के स्वागत भाषण से लेकर आयोजन सचिव डॉ. हरीश गुजराती के आभार प्रदर्शन तक, हर गतिविधि ने इसकी सफलता में चार चांद लगाए। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अफगानिस्तान के नौ शोधार्थियों की उपस्थिति ने वैश्विक संवाद को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। कार्यक्रम में नगर परिषद के पूर्व सभापति नरेश कन्नौजिया, जैतारण प्रधान मेघाराम सोलंकी, सह-समन्वयक डॉ. एमआर सिंगारिया, प्रो. अंजलि जयपाल, प्रो. संध्या जयपाल, डॉ. सीमा शर्मा, प्रो. गिरीश सिंह, प्रो. वीरेंद्र सिंह भाटी, प्रो. जलालुद्दीन काठात, एनके वैष्णव, डॉ. निशा बंसल और डॉ. संदीप देवल सहित बड़ी संख्या में शोध छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। डॉ. हरीश कुमार और श्वेता स्वामी के कुशल मंच संचालन ने कार्यक्रम के प्रवाह को अंत तक बनाए रखा। यह आयोजन न केवल ब्यावर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अकादमिक उत्कृष्टता का एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau
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