रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया: 1,450 ट्रेनों में ओबीएचएस, 63 स्टेशनों पर क्लीन ट्रेन योजना से स्वच्छता मजबूत
भारतीय रेल ने अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि 1,450 जोड़ी ट्रेनों में ओबीएचएस, 63 स्टेशनों पर क्लीन ट्रेन स्टेशन योजना और विभिन्न अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों के जरिए व्यापक व्यवस्था लागू की गई है।

तस्वीर में भारतीय रेल के अधिकारियों और कर्मचारियों का एक समूह एक हॉल में बैठक के दौरान बैठा हुआ दिखाई दे रहा है।
भारतीय रेल ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट के संग्रहण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान के लिए व्यापक व्यवस्था लागू की है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामलों की निगरानी और प्रबंधन के लिए मंडलों, क्षेत्रीय रेलों तथा रेलवे बोर्ड स्तर पर समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (ईएनएचएम) विभाग स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर स्रोत स्तर पर ही अपशिष्ट के संग्रहण और पृथक्करण के लिए दोहरे कूड़ेदान उपलब्ध कराए गए हैं। ट्रेनों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट का नियमित अंतराल पर नामित अपशिष्ट प्रबंधन स्टेशनों पर संग्रहण किया जाता है। इन स्टेशनों ने अपशिष्ट के उचित निपटान के लिए शहरी स्थानीय निकायों और नगर निकायों के साथ आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं।
रेल मंत्री के अनुसार, भारतीय रेल ने परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न स्टेशनों पर बायोगैस संयंत्र, कम्पोस्टिंग संयंत्र, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तथा प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन जैसी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाएं भी स्थापित की हैं। वर्तमान में 13 बायोगैस संयंत्र स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 5,095 किलोग्राम प्रतिदिन है। इसके अलावा 171 कम्पोस्टिंग संयंत्र 24,817 किलोग्राम प्रतिदिन क्षमता के साथ कार्यरत हैं, जबकि 8 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी की कुल क्षमता 7,725 किलोग्राम प्रतिदिन है। वहीं, 858 प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें भी स्थापित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के लागू होने तथा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में भारतीय रेल ने अपने विभिन्न प्रतिष्ठानों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं। रेलवे बोर्ड ने रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों, कार्यशालाओं, उत्पादन इकाइयों तथा अन्य सभी रेलवे प्रतिष्ठानों को शामिल करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
एसओपी में अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान के साथ-साथ निगरानी तंत्र तथा सभी प्रशासनिक स्तरों पर स्पष्ट रूप से निर्धारित जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्रीय रेलों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आने वाली अपनी इकाइयों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
भारतीय रेल के सभी प्रतिष्ठानों और ट्रेनों में वर्तमान अपशिष्ट उत्पादन का आकलन करने के लिए “एज़-इज़ वेस्ट कैरेक्टराइजेशन एंड क्वांटिफिकेशन स्टडी” की भी योजना बनाई गई है। इसके साथ ही क्षेत्रीय रेलों ने अपशिष्ट प्रबंधन के लिए व्यापक कार्य-योजनाएं तैयार करने, समय-समय पर ऑडिट कराने, कार्यान्वयन की निगरानी करने तथा नियमित रूप से रेलवे बोर्ड को अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए समर्पित नोडल अधिकारियों को नामित किया है। मंडलों को भी प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य-योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) संचालित की जा रही है। यह सेवा वर्तमान में 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की चिन्हित ट्रेनों में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 63 स्टेशनों पर क्लीन ट्रेन स्टेशन (सीटीएस) योजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत 2,800 ट्रेनों को कवर किया जा रहा है। इस योजना के तहत सफाई उपकरणों से सुसज्जित समर्पित कर्मचारी ट्रेन के ठहराव के दौरान कोचों के शौचालयों और वॉशबेसिनों की सफाई करते हैं तथा ट्रेनों में लगे कूड़ेदानों से कचरा एकत्र करते हैं। राज्यसभा में दिए गए इस जवाब में रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन उपायों के माध्यम से भारतीय रेल वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण की दृष्टि से सतत् स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रही है।

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