भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने रॉलिंग ब्लॉक व्यवस्था में व्यापक सुधार के संकेत दिए हैं। 21 जून 2026 को बीकानेर से जयपुर तक के अपने निरीक्षण दौरे के दौरान, श्री वैष्णव ने युवा रेलवे अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु रेलवे के रखरखाव कार्यों के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करना और संसाधनों के प्रबंधन को अधिक कुशल बनाना रहा।

वर्तमान में भारतीय रेल ट्रैक, सिग्नलिंग प्रणाली और विद्युतीकृत लाइनों के रखरखाव के लिए 26 सप्ताह की रॉलिंग ब्लॉक योजना का पालन करती है, जिसके कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है। युवा अधिकारियों के साथ संवाद करते हुए, मंत्री ने 'मेगा ब्लॉक' की अभिनव अवधारणा पर जोर दिया। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि रखरखाव कार्यों को एक ही समय में समेकित किया जाए, जिसमें ट्रैक, सिग्नलिंग और ओएचई (OHE) से संबंधित तकनीकी कार्यों को एक साथ पूरा किया जा सके। विशेष रूप से, रविवार या कम यात्री भार वाले दिनों में इन ब्लॉकों को प्राथमिकता देने की योजना पर सहमति बनी, जिससे दैनिक यात्रियों की आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

श्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल को नवाचारपूर्ण और यात्री केंद्रित बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने उत्तर पश्चिम रेलवे को इन सुझावों को तत्काल प्रायोगिक आधार पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो मेगा ब्लॉक की इस एकीकृत कार्यप्रणाली को चरणबद्ध तरीके से पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर लागू किया जाएगा। यह निर्णय न केवल रेलवे की परिचालन दक्षता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में यात्री यात्रा को सुगम और निर्बाध बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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