केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने जुलाई 2026 तक 1.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए हैं, जो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित 2,93,030 करोड़ रुपये के कुल बजट अनुदान का लगभग 39 प्रतिशत है। रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरक्षा है और इसी दिशा में 'कवच 4.0' को 2,633 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। इसमें दिल्ली-मुंबई रूट पर 1,423 रूट किलोमीटर और दिल्ली-हावड़ा रूट पर 1,210 रूट किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। रेलवे सुरक्षा के लिए जून 2026 तक कवच से जुड़ी परियोजनाओं पर 3,875 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2,066 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आवंटित किया गया है।

रेलवे सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला 'कवच' पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे सुरक्षा के उच्चतम स्तर SIL-4 का प्रमाणन प्राप्त है। यह हाई-टेक सिस्टम लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन चलाने में सहायता करता है और आपात स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाने की क्षमता रखता है। कवच के विकास की यात्रा 2016 में पैसेंजर ट्रेनों पर फील्ड ट्रायल से शुरू हुई थी, जिसके बाद 2018-19 में इसके 3.2 संस्करण को मंजूरी मिली और जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया। 16 जुलाई 2024 को आरडीएसओ ने इसके उन्नत 'कवच स्पेसिफिकेशन वर्शन 4.0' को मंजूरी दी, जिसमें लोकेशन की सटीकता और सिग्नल की बेहतर जानकारी जैसे फीचर्स शामिल हैं। प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-मुंबई मार्ग पर तिलक ब्रिज-पलवल-मथुरा-कोटा-वडोदरा-विरार खंड के 1,327 किलोमीटर और वडोदरा-अहमदाबाद के 96 किलोमीटर पर काम पूरा हो चुका है। इसी तरह दिल्ली-हावड़ा मार्ग के विभिन्न खंडों जैसे कानपुर-लखनऊ, गया-निमियाघाट और बर्धमान-हावड़ा में भी व्यापक स्तर पर इसे लागू किया गया है।

क्षमता विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भारतीय रेलवे ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्तमान में लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 514 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत 40,000 किलोमीटर के दायरे में 169 नई लाइनें, 29 गेज कन्वर्जन और 316 दोहरीकरण के कार्य शामिल हैं। नए ट्रैक बिछाने की रफ्तार 2009-14 के 4.2 किलोमीटर प्रति दिन से बढ़कर 2014-26 के दौरान 8.32 किलोमीटर प्रति दिन हो गई है, जो लगभग दोगुना वृद्धि दर्शाती है। सुरक्षा पर खर्च का बजट भी 2013-14 के 39,200 करोड़ रुपये से लगातार बढ़ते हुए 2026-27 में 1,20,389 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ट्रैक अपग्रेडेशन के फलस्वरूप 110 किमी/घंटा और उससे अधिक की गति वाले ट्रैक की हिस्सेदारी 2014 के करीब 40 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 81 प्रतिशत हो गई है। 'मिशन रफ्तार' के तहत प्रमुख मार्गों पर ट्रेनों की गति 160 किमी/घंटा तक बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसका सफल परीक्षण वंदे भारत ट्रेनों के साथ किया जा चुका है।

रेलवे कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के लिए सेंट्रलाइज्ड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स और गति शक्ति विश्वविद्यालय के माध्यम से हर साल लगभग 6 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण इकोसिस्टम कोल इंडिया, एनटीपीसी, सेल और आईओसीएल जैसे संगठनों के लिए भी विशेष प्रबंधन विकास कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। रेलवे का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, कुशल माल ढुलाई और एकीकृत लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के जरिए सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन सेवाएं सुनिश्चित करना है।

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