पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट और इसके परिणामस्वरूप वैश्विक रसद एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़े अप्रत्यक्ष प्रतिकूल प्रभावों की गंभीर चुनौतियों को धता बताते हुए भारतीय रेलवे ने राष्ट्रीय परिवहन की जीवनरेखा के रूप में अपनी अद्वितीय क्षमता का लोहा मनवाया है। रेलवे ने निरंतर परिचालन निगरानी और संसाधनों के अत्यंत कुशल व रणनीतिक उपयोग के माध्यम से देश भर में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित रखी है। इस दृढ़ प्रतिबद्धता के चलते भारतीय रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में माल ढुलाई में अपनी वृद्धि की तीव्र गति को सफलतापूर्वक बरकरार रखा है। रेलवे द्वारा मई 2026 के अंत तक रिकॉर्ड 145 मिलियन टन माल की लोडिंग का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल कर लिया गया, जो पिछले वर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 1.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विकास को मुख्य रूप से लौह अयस्क, कच्चे लोहे, तैयार इस्पात, उर्वरक और अन्य शेष वस्तुओं के क्षेत्रों में दर्ज किए गए बेहद मजबूत व शानदार प्रदर्शन से ठोस समर्थन मिला है।

इस राष्ट्रव्यापी प्रगति में उत्तर पश्चिम रेलवे ने भी अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा अप्रैल और मई 2026 के दौरान कुल मिलाकर लगभग 6 मिलियन टन माल की लोडिंग सुनिश्चित की गई है। मई 2026 तक हासिल किया गया माल ढुलाई का यह पैमाना पिछले वर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत की भारी और रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि को प्रदर्शित करता है। प्रमुख वस्तुओं के वर्गीकरण का बारीकी से विश्लेषण करें तो अन्य वस्तुओं के शेष माल के क्षेत्र में 16 प्रतिशत की सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने वाले लौह अयस्क की लोडिंग में 4.8 प्रतिशत तथा कच्चा लोहा एवं तैयार इस्पात की लोडिंग में पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 3.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कृषि क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी माने जाने वाले उर्वरकों की लोडिंग में भी 6.2 प्रतिशत की शानदार और उत्साहजनक वृद्धि देखी गई है, जो देश के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को निरंतर और पूर्ण समर्थन देने के प्रति रेलवे की अटूट प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, रेल माल ढुलाई के राजस्व में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले कोयले की लोडिंग में भी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के विभिन्न तापीय ऊर्जा संयंत्रों की अनिवार्य आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे ने पूरे रेल नेटवर्क में कोयले की आवाजाही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और इसके संपूर्ण परिवहन तंत्र पर बेहद कड़ी व निरंतर निगरानी रखी। इसके साथ ही, चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी घरेलू और आयातित दोनों ही प्रकार के कंटेनर यातायात की निगरानी को व्यापक रूप से तेज कर दिया गया, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की समग्र दक्षता अक्षुण्ण रही।

यात्री परिवहन और सुगमता के मोर्चे पर भी भारतीय रेलवे ने मई 2026 के दौरान एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रेलवे ने इस एकल महीने में 61 करोड़ से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की सुरक्षित परिवहन सेवाएं प्रदान कीं, जबकि पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा लगभग 59 करोड़ यात्रियों का था। यात्री संख्या में दर्ज की गई यह भारी वृद्धि मुख्य रूप से गैर-उपनगरीय खंड में दर्ज की गई 7.4 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि के कारण संभव हुई है, जिसके तहत यात्रियों की संख्या पिछले साल के 28 करोड़ से सीधे बढ़कर इस वर्ष 30 करोड़ के पार पहुंच गई। यह बदलाव देश भर में छोटी और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए रेल यात्रा के प्रति नागरिकों की लगातार बढ़ती प्राथमिकता और अटूट विश्वास को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। गर्मी के मौसम में यात्रा की अचानक बढ़ी मौसमी मांग को तत्परता से पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे ने विभिन्न व्यस्त मार्गों पर रिकॉर्ड संख्या में विशेष ग्रीष्मकालीन ट्रेनें संचालित कीं।

आधुनिक रेल सेवाओं के निरंतर और तीव्र विस्तार से यात्रियों की यात्रा को बेहद सुविधाजनक, सुलभ और आरामदायक बनाया गया है। राष्ट्रीय परिवहन कंपनी वर्तमान में देश भर में कुल 164 वंदे भारत सेवाओं का सफल परिचालन कर रही है, जिसमें हाल ही में यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई हावड़ा और कामाख्या के बीच देश की पहली स्लीपर वंदे भारत सेवा भी विशेष रूप से शामिल है। इसके साथ ही, आम जनता के लिए बेहद लोकप्रिय अमृत भारत सेवाओं की कुल संख्या भी अब 68 के आंकड़े तक पहुंच गई है, जिनमें से तीन अत्याधुनिक नई अमृत भारत सेवाओं का शुभारंभ इसी मई 2026 के महीने में किया गया है।

इसी आधुनिक रेल विस्तार की कड़ी में उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकार क्षेत्र में भी वर्तमान में 05 अत्याधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस रेल सेवाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है। पहली सेवा गाड़ी संख्या 12461/12462, जोधपुर-साबरमती-जोधपुर वंदे भारत एक्सप्रेस रेलसेवा है, जो पाली मारवाड़, फालना, आबूरोड़, पालनपुर और महेसाना से होकर कुल 08 कोचों के साथ सफलतापूर्वक चल रही है। दूसरी सेवा गाड़ी संख्या 20977/20978, अजमेर-चंडीगढ़-अजमेर वंदे भारत एक्सप्रेस रेलसेवा है, जो किशनगढ़, जयपुर, गांधीनगर जयपुर, अलवर, रेवाड़ी, गुड़गांव, दिल्ली कैंट और अंबाला जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर कुल 18 कोचों के रैक के साथ संचालित की जा रही है। तीसरी सेवा गाड़ी संख्या 26471/26472, बीकानेर-दिल्ली कैंट-बीकानेर वंदे भारत एक्सप्रेस रेलसेवा है, जो श्रीडूंगरगढ़, रतनगढ़, चुरू, सादुलपुर, लोहारू, महेंद्रगढ़ और गुड़गांव के रास्ते कुल 08 कोचों के साथ अपनी सेवाएं दे रही है। चौथी सेवा गाड़ी संख्या 26481/26482, जोधपुर-दिल्ली कैंट-जोधपुर वंदे भारत एक्सप्रेस रेलसेवा है, जो मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, फुलेरा, जयपुर, गांधीनगर जयपुर, अलवर, रेवाड़ी और गुड़गांव होकर कुल 18 कोचों के साथ यात्रियों को तीव्र परिवहन सेवा प्रदान कर रही है। पांचवीं सेवा गाड़ी संख्या 26481/26482 के समानांतर ही इस रूट पर चलने वाली और क्षेत्र को जोड़ने वाली अन्य सेवाओं सहित अंततः गाड़ी संख्या 26963/26964, उदयपुर सिटी-असारवा-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस रेलसेवा है, जो जावर, डूंगरपुर, शामलाजी रोड और हिम्मतनगर होकर कुल 08 कोचों के संयोजन के साथ पटरियों पर दौड़ रही है। माल ढुलाई में इस निरंतर और ऐतिहासिक वृद्धि, अर्थव्यवस्था के प्रमुख वस्तु क्षेत्रों में दर्ज किए गए बेहद मजबूत प्रदर्शन तथा यात्री परिवहन की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ, भारतीय रेलवे ने संपूर्ण देश के परिवहन नेटवर्क की रीढ़ के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक सुदृढ़ व अक्षुण्ण कर लिया है, जो भारत की समग्र आर्थिक गतिविधियों को निर्बाध गति प्रदान करने और देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों को आपस में जोड़ने का महान कार्य कर रही है।

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