भारतीय रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में आकस्मिक कारणों से लगने वाली आग सहित सभी संभावित खतरों से निपटने के लिए अपने सभी जोनों में रोकथाम, तैयारी, त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों को लगातार मजबूत कर रहा है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि रेलवे का प्राथमिक उद्देश्य आग जैसी किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जान बचाना, घायलों का तत्काल उपचार कराना और फंसे हुए यात्रियों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराना है।

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा रेत और पानी से भरी आग बुझाने वाली बाल्टियों की व्यवस्था भी की गई है। भारतीय रेलवे यह सुनिश्चित करता है कि उसके फ्रंटलाइन कर्मचारी अग्निशमन, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त कर आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए सदैव तैयार रहें। स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), कमर्शियल-कम-टिकट क्लर्क, लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट सहित अन्य फ्रंटलाइन कर्मचारियों के प्रशिक्षण मॉड्यूल में इन विषयों को शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेल आपदा प्रबंधन संस्थान (आईआरआईडीएम) ट्रेन क्रू और ऑन-बोर्ड कर्मचारियों, जैसे ट्रेन टिकट परीक्षक, एसी कोच स्टाफ तथा एस्कॉर्टिंग स्टाफ को अग्निशमन, प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा प्रबंधन सहित विभिन्न आपदा प्रबंधन विषयों पर नियमित प्रशिक्षण प्रदान करता है, ताकि दुर्घटना के शुरुआती महत्वपूर्ण समय यानी गोल्डन ऑवर में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

रेल मंत्री के अनुसार रेलवे स्टेशनों और नियंत्रण कक्षों के अधिकारियों के लिए निकटतम दमकल विभाग, पुलिस, चिकित्सा सुविधाओं, एम्बुलेंस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) सहित संबंधित एजेंसियों से तत्काल संपर्क स्थापित करने के लिए निर्धारित संचार प्रोटोकॉल लागू हैं तथा उनके संपर्क नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने बताया कि बड़े रेलवे स्टेशनों के रिले रूम और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रूम में ऑटोमैटिक फायर अलार्म लगाए जा रहे हैं। स्टेशन मास्टर के लिए कंट्रोल फोन की व्यवस्था की गई है, जिससे ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) में आग लगने की स्थिति में बिजली आपूर्ति तुरंत बंद की जा सके। सार्वजनिक घोषणा प्रणाली का उपयोग आग जैसी आपात स्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जाता है। यात्रियों को ज्वलनशील वस्तुएं साथ न लाने के प्रति नियमित रूप से जागरूक किया जाता है। बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की स्कैनिंग की जाती है तथा विशेष अवधियों में ज्वलनशील सामग्री की रोकथाम के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की संभावना को रोकने के लिए रेलवे स्टेशनों पर विद्युत प्रणालियों का नियमित रखरखाव किया जाता है। इलेक्ट्रिकल पैनलों में मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) और मोल्ड्ड केस सर्किट ब्रेकर (एमसीसीबी) लगाए गए हैं तथा आपातकालीन लाइटों की भी व्यवस्था की गई है। निकास मार्गों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया है ताकि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बड़े रेलवे स्टेशनों पर कोचों में पानी भरने की सुविधा वाले स्थानों पर पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था भी उपलब्ध है। रेलवे प्लेटफॉर्म पर आग जलाकर खाना पकाने की अनुमति नहीं है तथा रेलवे स्टेशनों और कार्यालय भवनों के सभी विद्युत प्रतिष्ठानों का नियमित सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण किया जाता है।

ट्रेनों में अग्नि सुरक्षा के संबंध में श्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे के सभी कोचों में कम से कम दो अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं। पावर कारों और पैंट्री कारों के आग की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाया गया है। मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोचों में फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम की व्यवस्था भी की गई है। चरणबद्ध तरीके से पैंट्री कारों और पावर कारों में वाटर मिस्ट प्रकार के अग्निशामक यंत्र लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आग लगने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए कोचों में इमरजेंसी विंडो उपलब्ध कराई गई हैं। सीटों, बर्थ, पैनलों, फर्श, इंसुलेशन, शौचालयों सहित विभिन्न हिस्सों में वैश्विक अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप अग्नि-रोधी सामग्री का उपयोग किया जाता है। कोचों में फायर-रिटार्डेंट ई-बीम केबल्स लगाए गए हैं तथा विद्युत सर्किटों में फ्यूज, मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) और मोटर प्रोटेक्शन सर्किट ब्रेकर (एमपीसीबी) जैसी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। इलेक्ट्रिकल कैबिनेट में एरोसोल आधारित फायर सप्रेशन सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है। अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में आधुनिक सामग्री की फिटिंग के साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप सामग्री का लगातार उन्नयन किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि सभी कोचों में यात्रियों को "क्या करें" और "क्या न करें" संबंधी विस्तृत फायर नोटिस प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें ज्वलनशील सामग्री और विस्फोटक साथ न ले जाने, कोचों के भीतर धूम्रपान पर प्रतिबंध तथा दंड संबंधी जानकारी दी गई है। कोचों के भीतर आग जलाकर खाना पकाने पर प्रतिबंध है। वंदे भारत ट्रेनों के प्रत्येक कोच में चार इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से यात्री आपात स्थिति में ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क कर सकते हैं। प्रत्येक कोच में चार पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म पुश बटन भी लगाए गए हैं। इसके अलावा 'रेल मदद' नामक इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन के माध्यम से यात्री 139 नंबर पर आपात सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सभी उपायों के बावजूद भारतीय रेलवे किसी भी संभावित आग या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है। ऐसी घटनाओं में सबसे पहले प्रशिक्षित रेलवे कर्मचारी मौके पर कार्रवाई करते हैं। सूचना मिलते ही रेलवे अपने संसाधनों, उपकरणों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्य शुरू करता है तथा राज्य सरकार और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करता है। प्राथमिकता लोगों की जान बचाने, घायलों का उपचार करने और फंसे यात्रियों को राहत उपलब्ध कराने की होती है।

उन्होंने बताया कि पूरे रेलवे नेटवर्क में 177 एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेनें (एआरटी), 100 उच्च क्षमता वाली 140टी ब्रेकडाउन डीजल-हाइड्रोलिक क्रेन तथा 170 एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट (एआरएमई) स्केल-I इकाइयां चिन्हित स्थानों पर तैनात हैं। इसके अतिरिक्त एआरएमई स्केल-II और पोर्टेबल मेडिकल किट भी उपलब्ध हैं। एआरएमई स्केल-I पहियों पर बने अस्पताल की तरह कार्य करते हैं, जिन्हें चिकित्सा उपकरणों, आवश्यक सामग्री और प्रशिक्षित कर्मियों के साथ तुरंत दुर्घटनास्थल के लिए रवाना किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर सड़क वाहन, अर्थमूवर और एम्बुलेंस जैसी अतिरिक्त मशीनरी भी जुटाई जाती है। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी पूर्व निर्धारित होती है तथा उन्हें उसके अनुरूप प्रशिक्षण और अधिकार दिए गए हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि आग जैसी किसी भी बड़ी असामान्य घटना की सूचना मिलते ही भारतीय रेलवे जिला प्रशासन, दमकल विभाग, चिकित्सा संस्थानों, पुलिस बल और अन्य स्थानीय नागरिक एजेंसियों को तत्काल सूचित करता है। रेलवे और इन सभी एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई के लिए पूरे भारतीय रेलवे में निर्धारित प्रणालियां और प्रोटोकॉल लागू हैं। आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने की प्रक्रियाएं जोन और मंडलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं, सामान्य एवं सहायक नियमों, दुर्घटना नियमावली और संचालन नियमावली में निर्धारित हैं। रेलवे स्टेशन निकटतम अग्निशमन केंद्रों, रेलवे और गैर-रेलवे चिकित्सा संस्थानों, निजी चिकित्सकों तथा फर्स्ट-एइडर्स की सूची और उनके संपर्क नंबरों का नियमित रूप से रखरखाव और प्रदर्शन करते हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे अपनी आपातकालीन तैयारियों को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करता है। मंडलों द्वारा रेलवे की सभी बचाव एजेंसियों के साथ-साथ दमकल विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन, चिकित्सा संस्थानों तथा आपदा प्रतिक्रिया बलों को शामिल करते हुए पूर्ण-स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और भावनगर मंडलों में आयोजित चार मॉक ड्रिल सहित कुल 71 पूर्ण-स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गईं। लोकसभा में दिए गए अपने लिखित उत्तर में श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे की यह बहु-स्तरीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आग जैसी किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए लगातार सुदृढ़ की जा रही है।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story