भारतीय रेलवे देश के सभी वर्गों को किफायती, उच्च-गुणवत्ता वाली और यात्री-केंद्रित रेल सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। देश में ही डिजाइन और विकसित की गई वंदे भारत (चेयर कार और स्लीपर), अमृत भारत और नमो भारत रैपिड रेल सेवाएं आधुनिक कोच, बेहतर सुरक्षा सुविधाओं और यात्री सुविधाओं के साथ रेल यात्रा के अनुभव को बदल रही हैं।

भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया परिचालन संबंधी आवश्यकताओं, सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी व्यवहार्यता, व्यावसायिक व्यवहार्यता और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर लगातार जारी है। इसका उद्देश्य सुरक्षा, क्षमता, गति, परिचालन दक्षता, यात्रियों के आराम, पर्यावरणीय स्थिरता और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल में सुधार करना है।

सेमी-हाई स्पीड ट्रेन प्रणाली के तहत भारतीय रेलवे ने देश में निर्मित वंदे भारत, अमृत भारत और नमो भारत रैपिड रेल सेवाओं को शुरू किया है। इन ट्रेनों में आधुनिक कोच, उन्नत सुरक्षा प्रणाली और यात्रियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

वंदे भारत ट्रेन सेवाओं का विस्तार

15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-प्रयागराज-वाराणसी कॉरिडोर पर पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद वंदे भारत सेवाओं का विस्तार पूरे देश के रेल नेटवर्क में तेजी से हुआ है। वर्तमान में 162 वंदे भारत (चेयर कार) ट्रेन सेवाएं संचालित हो रही हैं।

देश में डिजाइन और निर्मित वंदे भारत ट्रेनों में झटके-रहित सेमी-परमानेंट कपलर, कवच प्रणाली, सेंट्रली कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक प्लग डोर, पूरी तरह सील किए गए चौड़े गैंगवे, इमरजेंसी अलार्म पुश बटन और टॉक-बैक यूनिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इन ट्रेनों में इलेक्ट्रिकल कैबिनेट और टॉयलेट में एरोसोल आधारित आग का पता लगाने और बुझाने की प्रणाली, 180/160 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन और ऑपरेटिंग स्पीड, ड्राइवर-गार्ड कम्युनिकेशन के लिए वॉइस रिकॉर्डिंग सुविधा और क्रैश-हार्डन्ड मेमोरी जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए एयर कंडीशनिंग यूनिट में देश में विकसित UV-C लैंप आधारित डिसइंफेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जो ठंडी हवा से 99 प्रतिशत हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है। सभी कोच में CCTV, दिव्यांग यात्रियों के लिए दोनों सिरों पर ड्राइविंग कोच में विशेष टॉयलेट और रिमोट मॉनिटरिंग के साथ कोच कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CCMS) डिस्प्ले की सुविधा दी गई है।

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर वंदे भारत ट्रेन सेवाओं (चेयर कार) की 81 जोड़ियां चल रही हैं।

वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत

लंबी दूरी की यात्रा के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस का स्लीपर संस्करण स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। ऐसी दो ट्रेनें तैयार की जा चुकी हैं और व्यापक परीक्षण के बाद भारतीय रेलवे में शामिल की गई हैं।

पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा 27575/27576 हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ने 22.01.2026 से नियमित संचालन शुरू किया।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेट में झटके-रहित सेमी-परमानेंट कपलर और एंटी-क्लाइंबर, कवच प्रणाली, 180/160 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन और ऑपरेटिंग स्पीड, EN मानकों के अनुसार क्रैश-प्रूफ कार बॉडी डिजाइन, फायर बैरियर दरवाजे, एरोसोल आधारित फायर डिटेक्शन और बुझाने वाली प्रणाली जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

इन ट्रेनों में ऊर्जा बचाने के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम, UV-C लैंप आधारित डिसइंफेक्शन सिस्टम, सेंट्रली कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक प्लग दरवाजे, पूरी तरह सील गैंगवे, CCTV, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट, दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष टॉयलेट, सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम और ऊपरी बर्थ तक पहुंचने के लिए आरामदायक सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है।

वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे के आधुनिक, कुशल और यात्री-केंद्रित बदलाव को दर्शाती हैं। नई पीढ़ी के ट्रेनसेट, बेहतर ऑनबोर्ड सेवाओं और स्वदेशी निर्माण क्षमता के विस्तार के जरिए ये ट्रेनें क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक एकीकरण और टिकाऊ परिवहन को मजबूत कर रही हैं।

नमो भारत रैपिड रेल सेवा

नमो भारत रैपिड रेल को वंदे भारत ट्रेनों की खूबियों के आधार पर कम दूरी की उपनगरीय और क्षेत्रीय यात्रा को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया है।

इन ट्रेनों में सेंट्रली कंट्रोल्ड डबल लीफ ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे, CCTV निगरानी, कुशन वाली सीटें, सीलबंद फ्लेक्सिबल गैंगवे, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम, ऊर्जा दक्ष LED लाइटिंग, वैक्यूम इवैक्यूएशन वाले FRP मॉड्यूलर टॉयलेट और पूरी तरह एयर-कंडीशंड कोच उपलब्ध हैं।

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर नमो भारत रैपिड रेल सेवा की दो जोड़ी ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इनमें 94803/94804 जयनगर-पटना नमो भारत रैपिड रेल और 94801/94802 अहमदाबाद-भुज नमो भारत रैपिड रेल शामिल हैं।

अमृत भारत ट्रेन सेवाओं का विस्तार

कम और मध्यम आय वाले परिवारों को सस्ता परिवहन उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे ने अमृत भारत सेवा शुरू की है। ये पूरी तरह नॉन-AC आधुनिक ट्रेनें हैं।

अमृत भारत ट्रेन में 11 जनरल क्लास कोच, 8 स्लीपर क्लास कोच, 01 पैंट्री कार और 02 लगेज-कम-दिव्यांगजन कोच होते हैं।

इन ट्रेनों में वंदे भारत स्लीपर की तर्ज पर बेहतर डिजाइन वाली सीटें और बर्थ, झटके-रहित सेमी-ऑटोमैटिक कपलर, क्रैश ट्यूब, CCTV सिस्टम, बेहतर टॉयलेट डिजाइन, बेहतर LED लाइट फिटिंग, चार्जिंग सॉकेट, EP-असिस्टेड ब्रेकिंग सिस्टम, एरोसोल आधारित फायर सप्रेशन सिस्टम, USB टाइप-A और टाइप-C मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम और पूरी तरह सील किए गए गैंगवे जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

वर्तमान में अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओं की 36 जोड़ियां भारतीय रेलवे नेटवर्क पर संचालित की जा रही हैं।

पहली हाइड्रोजन ट्रेन "नमो ग्रीन रेल"

नई तकनीक विकसित करने की दिशा में भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ट्रेन "नमो ग्रीन रेल" 17.07.2026 को लॉन्च की गई। यह वैकल्पिक ऊर्जा आधारित रेल यात्रा की दिशा में भारतीय रेलवे की पहल को दर्शाती है।

इस परियोजना में डिजाइनिंग, प्रोटोटाइप निर्माण और भारतीय रेलवे में पहली बार हाइड्रोजन ट्रैक्शन तकनीक का विकास शामिल रहा।

हाइड्रोजन ट्रेन-सेट भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। यह ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर दुनिया की सबसे लंबी 10 कोच और सबसे शक्तिशाली 2400 kW हाइड्रोजन ट्रेन-सेट है। इसमें 1200 kW की दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) और आठ पैसेंजर कारें हैं। यह ट्रेन शून्य CO₂ उत्सर्जन करती है और केवल जल वाष्प उत्सर्जित करती है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना

भारत में हाई-स्पीड ट्रेन सिस्टम के तहत मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना पर काम जारी है। 508 किलोमीटर लंबी यह परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा और नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश से होकर गुजर रही है।

इस परियोजना में मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती में 12 स्टेशन बनाए जाने हैं।

MAHSR परियोजना के लिए 1389.5 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं और 1651 यूटिलिटीज जैसे बिजली के खंभे और पाइपलाइन हटाए जा चुके हैं।

परियोजना में अब तक 452 किलोमीटर पियर्स, 356 किलोमीटर गर्डर, 209 किलोमीटर ट्रैक बेड और 190 किलोमीटर OHE मास्ट का काम पूरा हो चुका है।

साबरमती स्टेशन पर नींव का काम पूरा हो गया है और प्लेटफॉर्म स्लैब, छत के स्ट्रक्चरल काम तथा फिनिशिंग का काम चल रहा है। अहमदाबाद स्टेशन पर स्ट्रक्चरल काम पूरा हो चुका है और फिनिशिंग शुरू हो गई है। वडोदरा स्टेशन पर नींव का काम पूरा हो गया है और स्ट्रक्चरल व फिनिशिंग कार्य शुरू हो चुके हैं। भरूच स्टेशन पर स्ट्रक्चरल कार्य पूरे हो चुके हैं और फिनिशिंग शुरू है। बोइसर स्टेशन पर नींव का काम आगे बढ़ चुका है और स्ट्रक्चरल काम शुरू हो गए हैं। BKC मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड स्टेशन है, जहां नींव का काम लगभग पूरा हो गया है और बेस स्लैब का काम शुरू हो चुका है।

परियोजना में समुद्र के नीचे बनने वाली लगभग 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र में घंसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर सुरंग का काम पूरा हो चुका है।

सूरत-वापी सेक्शन में नदी पुलों सहित सभी सिविल कार्य पूरे हो चुके हैं और 86 प्रतिशत ट्रैक बेड बिछाया जा चुका है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विकास की घोषणा की गई है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं।

हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को मंजूरी DPR के परिणाम, टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी स्टडी और फंडिंग विकल्पों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

स्वदेशीकरण और तकनीकी विकास

भारतीय रेलवे घरेलू HSR डिजाइन क्षमता को मजबूत करने के लिए भारतीय वर्कशॉप में लंबे-स्पैन वाले स्टील ट्रस गर्डर बना रही है। फुल-स्पैन लॉन्चिंग के लिए भारी निर्माण मशीनरी अब भारत में बनाई जा रही है।

अधिकांश स्लैब ट्रैक सामग्री और विशेष ट्रैक मशीनें भारतीय निर्माताओं द्वारा विकसित की जा रही हैं। IIT के सहयोग से डिजाइन बदलाव और डायनामिक एनालिसिस से जुड़ी तकनीक विकसित की जा रही है।

भारत में पहली बार 40 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड बॉक्स गर्डर को फुल-स्पैन लॉन्चिंग तकनीक से स्थापित किया गया। शोर कम करने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ स्वदेशी नॉइज बैरियर लगाए जा रहे हैं।

BEML के सहयोग से आत्मनिर्भर रोलिंग स्टॉक विकसित किया जा रहा है, जिससे भारत हाई-स्पीड ट्रेनसेट डिजाइन और निर्माण करने वाले देशों में शामिल होगा।

भारतीय इंजीनियरों और कुशल कामगारों लगभग 1000 लोगों को जापानी कार्य-पद्धति के लिए प्रशिक्षित किया गया है। सूरत में विशेष ट्रैक ट्रेनिंग सुविधा बनाई गई है।

रेलवे में आधुनिक सुरक्षा तकनीक

भारतीय रेलवे में मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (MVIS), व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (WILD) और इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS) जैसी तकनीकें लागू की गई हैं।

MVIS AI/ML आधारित प्रणाली है जो चलती ट्रेनों के ढीले, लटकते या गायब पुर्जों का पता लगाकर अलर्ट देती है। WILD खराब पहियों की पहचान करता है। ITMS मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग के माध्यम से रेल, स्लीपर और फास्टनिंग में खराबी की निगरानी करता है। वर्तमान में IR ट्रैक रिकॉर्डिंग और निगरानी के लिए चार ITMS लगाए गए हैं।

सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के तहत 30.06.2026 तक 6671 स्टेशनों पर पुराने मैकेनिकल सिग्नलिंग की जगह इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इनमें 3954 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की सुविधा दी गई है।

30.06.2026 तक 10395 लेवल क्रॉसिंग गेट पर इंटरलॉकिंग, 6671 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग, 6085 ब्लॉक सेक्शन में ब्लॉक प्रोविंग एक्सल काउंटर और 7464 रूट किलोमीटर पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

कवच देश में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। 16.07.2024 को कवच स्पेसिफिकेशन वर्जन 4.0 को मंजूरी मिली और 13.07.2026 तक 2490 रूट किलोमीटर पर इसे सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं।

ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार

भारतीय रेलवे ट्रैक आधुनिकीकरण के लिए 60kg, 90 UTS रेल, इलास्टिक फास्टनिंग के साथ PSC स्लीपर, थिक वेब स्विच, वेल्डेबल CMS क्रॉसिंग, 260 मीटर लंबे रेल पैनल, फ्लैश बट वेल्डिंग तकनीक और आधुनिक ट्रैक मशीनों का उपयोग कर रहा है।

रेल और वेल्ड जांच के लिए एडवांस्ड फेज्ड ऐरे तकनीक, ट्रैक रिकॉर्ड के लिए वेब-इनेबल्ड ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम और पोर्टेबल ट्रैक मेजरिंग ट्रॉली का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमृत भारत स्टेशन योजना

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। योजना में स्टेशन पहुंच सुधार, शहर से बेहतर संपर्क, स्टेशन भवन विकास, वेटिंग हॉल, टॉयलेट, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, रैंप, प्लेटफॉर्म सुधार, वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क, पार्किंग, दिव्यांग सुविधाएं, यात्री सूचना प्रणाली, एयर कॉनकोर्स और मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इस योजना के तहत 1340 स्टेशनों को विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 261 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्लान हेड-53 ग्राहक सुविधाओं के तहत ₹11,972 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है और जून 2026 तक ₹4,633 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

ROB/RUB निर्माण में तेजी

भारतीय रेलवे ने सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए लेवल क्रॉसिंग हटाने और रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज बनाने की प्रक्रिया तेज की है।

ब्रॉड गेज नेटवर्क पर सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग 2019 में समाप्त कर दिए गए थे।

2004-14 के दौरान 4148 ROB/RUB बनाए गए, जबकि 2014-26 (मई 2026 तक) के दौरान 14451 ROB/RUB बनाए गए।

01.06.2026 तक भारतीय रेलवे पर लगभग ₹1,17,492 करोड़ की लागत से 4993 ROB/RUB कार्यों को मंजूरी दी गई है, जो योजना और निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।

केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में सवालों के जवाब में यह जानकारी दी।

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