भारतीय रेलवे (IR) के रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य मिशन मोड में शुरू किया गया है। रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

विद्युतीकरण की अभूतपूर्व प्रगति

अब तक, ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का लगभग 99.4% विद्युतीकरण हो चुका है। शेष नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य जारी है। 2014-25 के दौरान और उससे पहले किए गए विद्युतीकरण का विवरण इस प्रकार है:

  • वर्ष 2014 से पहले (लगभग 60 वर्ष): 21,801 किलोमीटर
  • वर्ष 2014-25 में: 46,900 किलोमीटर
  • 2023-24 से जनवरी 2026 तक: 10,932 किलोमीटर रेल का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण से 2024-25 में डीजल की खपत में 178 करोड़ लीटर की कमी आई है, जो 2016-17 की तुलना में 62% की कमी है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है।

राज्यों और क्षेत्रों की स्थिति: 25 राज्यों में पूर्ण विद्युतीकरण

25 राज्यों में रेलवे का पूर्ण विद्युतीकरण हो चुका है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विद्युतीकरण की स्थिति इस प्रकार है:

1. आंध्र प्रदेश 100%, 2. अरुणाचल प्रदेश 100%, 3. बिहार 100%, 4. चंडीगढ़ 100%, 5. छत्तीसगढ़ 100%, 6. दिल्ली 100%, 7. गुजरात 100%, 8. हरियाणा 100%, 9. हिमाचल प्रदेश 100%, 10. जम्मू और कश्मीर 100%, 11. झारखंड 100%, 12. केरल 100%, 13. मध्य प्रदेश 100%, 14. महाराष्ट्र 100%, 15. मेघालय 100%, 16. मिजोरम 100%, 17. नागालैंड 100%, 18. ओडिशा 100%, 19. पुडुचेरी 100%, 20. पंजाब 100%, 21. तेलंगाना 100%, 22. त्रिपुरा 100%, 23. उत्तर प्रदेश 100%, 24. उत्तराखंड 100%, 25. पश्चिम बंगाल 100%, 26. राजस्थान 99%, 27. असम 98%, 28. तमिलनाडु 97%, 29. कर्नाटक 97%, 30. गोवा 91%।

क्षेत्रवार विद्युतीकरण की स्थिति:

  • मध्य रेलवे, पूर्वी तटीय रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पूर्वी रेलवे, कोंकण रेलवे, कोलकाता मेट्रो, उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर पूर्वी रेलवे, उत्तरी रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्वी रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे: 100%
  • उत्तर पश्चिम रेलवे: 99%
  • पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे: 99%
  • दक्षिण रेलवे: 98%
  • दक्षिण पश्चिमी रेलवे: 96%
आर्थिक लाभ और निवेश

उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी वर्ष 2024-25 में वर्ष 2023-24 की तुलना में 75,492 किलो लीटर डीज़ल की बचत हुई है जिससे इस मद में लगभग 691 करोड़ रुपए का व्यय कम हुआ है। भारतीय रेलगाड़ी ने 2024-25 के दौरान कुल ऊर्जा खपत पर ₹32,378 करोड़ खर्च किए।

पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान, तमिलनाडु सहित रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं पर 29,826 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सभी नई रेल लाइन/मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को विद्युतीकरण के साथ स्वीकृत और निर्मित किया जा रहा है।

चुनौतियां और इंजन नीति

"विद्युतीकरण परियोजनाओं का पूरा होना कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वन संबंधी मंजूरी, अतिक्रमण करने वाली उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, क्षेत्र की भौगोलिक और स्थलाकृतिक स्थिति, परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति, जलवायु परिस्थितियों के कारण किसी विशेष परियोजना स्थल के लिए एक वर्ष में कार्य महीनों की संख्या आदि।"

रेलवे पर्यावरण और लागत संबंधी चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक इंजनों की ओर अग्रसर है। हालांकि बायो-डीजल पर परीक्षण किए जा चुके हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन बायो-डीजल की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी हैं। इलेक्ट्रिक और डीजल इंजनों के रखरखाव का विवरण रेलवे की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन और यात्री अनुभव

बायो-टॉयलेट, अलग-अलग कूड़ेदान, सीवेज ट्रीटमेंट, बोतल क्रशिंग मशीन और स्वच्छ भारत अभियान सहित उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन से यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है। इसके तहत उठाए गए कदम:

  • ट्रेनों के अंदर एकत्रित अपशिष्ट का निपटान निर्धारित स्टेशनों पर किया जाता है।
  • सफाई कर्मचारियों को पटरियों पर कूड़ा न फेंकने के सख्त निर्देश हैं; उल्लंघन पर कठोर दंड।
  • स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें (पीबीसीएम) और दो प्रकार के कूड़ेदान।
  • सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) की स्थापना।
  • यात्री डिब्बों में बायो-टॉयलेट लगाकर ट्रेनों से मानव मल के सीधे निर्वहन को समाप्त किया गया है।

बायो-टॉयलेट की संख्या का विवरण:

  • 2004-14: 9,587
  • 2014 से अब तक: 3,61,572

स्वच्छता मानकों में सुधार हेतु भारतीय रेलवे में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत विशेष स्वच्छता अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

Pratahkal Bureau

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