जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि:

"अंतरिम समझौते के ढांचे के तहत अमेरिका में हीरे और रंगीन रत्नों को शून्य शुल्क पर पहुंच देने की घोषणा से भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग बेहद उत्साहित है, खासकर उस कठिन वर्ष के बाद जब हमारे सबसे बड़े बाजार अमेरिका को कट और पॉलिश्ड हीरों का निर्यात 60% से अधिक गिरकर 3.64 अरब डॉलर से 1.45 अरब डॉलर रह गया।"

निर्यात में गिरावट और जीजेईपीसी के प्रयास

  • यह गिरावट मुख्य रूप से टैरिफ के कारण प्रतिस्पर्धा कम होने से हुई।
  • जीजेईपीसी ने इस खतरे को समय रहते उठाया।
  • भारत सरकार व वर्ल्ड डायमंड काउंसिल सहित वैश्विक उद्योग संगठनों के साथ लगातार प्रयास किए, ताकि एनेक्सचर III में शामिल किया जा सके।

शुल्क में कटौती और भविष्य की उम्मीदें

भंसाली ने कहा कि:

"इस ढांचे के तहत आभूषणों पर शुल्क घटाकर 18% किया गया है, जिससे तुरंत राहत मिलेगी। हमें उम्मीद है कि समझौते के पूरा होने पर हीरे और रंगीन रत्नों को पूरी तरह शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे निर्यात को फिर से गति मिलेगी और प्रतिस्पर्धा लौटेगी।"

सरकार के समक्ष रखे गए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

परिषद ने अमेरिका के टैरिफ से छूट वाली एनेक्सचर III सूची में लैब-ग्रोन हीरों और सिंथेटिक रत्नों को शामिल करने का मुद्दा भी भारत सरकार के सामने रखा है।

Pratahkal Bureau

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