पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में सरकार की तैयारियों पर विस्तृत वक्तव्य दिया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि खाड़ी देशों में तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार ने वैकल्पिक मार्गों तथा घरेलू उत्पादन में वृद्धि के माध्यम से पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है। 12 मार्च 2026 को दिए गए इस बयान में मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने कूटनीतिक कौशल से कच्चे तेल के आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है, जिससे देश पर वैश्विक व्यवधानों का न्यूनतम प्रभाव पड़ा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत की प्रतिक्रिया

"आधुनिक ऊर्जा इतिहास में विश्व ने इस प्रकार के संकट का सामना पहले कभी नहीं किया। आज से 13 दिन पहले ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच सैन्य अभियान के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिसके माध्यम से विश्व का 20 प्रतिशत कच्चा तेल, 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 20 प्रतिशत एलपीजी प्रवाहित होती है।" श्री पुरी ने बताया कि इतिहास में पहली बार यह मार्ग व्यावसायिक जहाजरानी के लिए प्रभावी रूप से बंद है। उन्होंने पड़ोसी देशों की तुलना करते हुए कहा कि जहाँ अन्य देशों में स्कूल बंद हैं और ईंधन की राशनिंग हो रही है, वहीं भारत की स्थिति नियंत्रण में है। भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिति सुरक्षित है और सुरक्षित किए गए आयतन हॉर्मुज मार्ग से प्राप्त होने वाली मात्रा से अधिक हैं। गैर-हॉर्मुज स्रोतों से आपूर्ति अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है, जो संकट से पहले 55 प्रतिशत थी। भारत अब 40 देशों से तेल प्राप्त कर रहा है, जबकि 2006-07 में यह संख्या केवल 27 थी।

पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस का प्रबंधन

मंत्री ने सदन को बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल और एटीएफ की कोई कमी नहीं है तथा रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर कार्य कर रही हैं। प्राकृतिक गैस के संदर्भ में, कतर की फोर्स मेजर घोषणा के बावजूद भारत ने वैकल्पिक खरीद से कमी को पूरा किया है। "9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत जारी प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश ने तत्काल प्राथमिकता अनुक्रम स्थापित किया है, जिसके तहत घरों को पीएनजी और वाहनों को सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति बिना किसी कटौती के मिल रही है।" उर्वरक संयंत्रों को 70 प्रतिशत और उद्योगों को 80 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है ताकि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र प्रभावित न हों।

एलपीजी उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और वितरण व्यवस्था

एलपीजी की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए श्री पुरी ने कहा कि खरीद को अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों तक विविधीकृत किया गया है। "8 मार्च 2026 को जारी एलपीजी नियंत्रण आदेश के बाद पिछले 5 दिनों में रिफाइनरी उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।" सरकार की प्राथमिकता 33 करोड़ परिवारों, विशेषकर गरीब वर्ग की रसोई को सुरक्षित रखना है। घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के लिए बुकिंग से डिलीवरी का मानक समय 2.5 दिन पर अपरिवर्तित है। कालाबाजारी रोकने के लिए डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड (DAC) का दायरा 90 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का बुकिंग अंतराल अनिवार्य किया गया है। व्यावसायिक एलपीजी के लिए भी तीन सदस्यीय समिति गठित कर वास्तविक जरूरत के आधार पर 20 प्रतिशत आवंटन राज्य सरकारों के समन्वय से किया जा रहा है।

वैश्विक कीमतों के मुकाबले भारतीय उपभोक्ताओं को राहत

श्री पुरी ने कहा कि वैश्विक बाजार में कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर रखी गई हैं। "जुलाई 2023 और मार्च 2026 के बीच सऊदी कॉन्ट्रैक्ट मूल्य में 41 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद, पीएमयूवाई लाभार्थी मूल्य उसी अवधि में 32 प्रतिशत कम होकर दिल्ली में 613 रुपये है।" सरकार ने वैश्विक कीमतों के कारण आवश्यक 134 रुपये के बोझ में से 74 रुपये स्वयं वहन किए हैं। तुलनात्मक रूप से पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल में एलपीजी की कीमतें भारत से कहीं अधिक हैं। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा भी स्वीकृत किया है।

राज्यों के साथ समन्वय और भविष्य की राह

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सहकारी संघवाद का उदाहरण देते हुए मंत्री ने बताया कि 11 मार्च 2026 को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली सहित सभी प्रमुख राज्यों के साथ बैठक कर जिला स्तरीय निगरानी समितियां बनाई गई हैं। वैकल्पिक ईंधन के रूप में बायोमास और कोयले के अस्थायी उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने अंत में अपील की कि यह समय अफवाहों का नहीं बल्कि एकजुट होने का है। भारत को अपने ऊर्जा योद्धाओं और इस संकट का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के पीछे राष्ट्रीय हित में एकजुट रहना चाहिए।

Pratahkal Bureau

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