: वैश्विक राजनीति और व्यापारिक समीकरणों में आ रहे व्यापक बदलावों के बीच, गुलाबी नगरी जयपुर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय रत्न एवं आभूषण जगत के केंद्र के रूप में उभरी है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) द्वारा आयोजित 'इंटरनेशनल जेम एंड ज्वैलरी शो' (आईजीजेएस) जयपुर 2026 का भव्य आयोजन 9 से 11 अप्रैल तक किया जा रहा है, जो भारतीय निर्माताओं और दुनिया भर के खरीदारों को एक सशक्त और एकीकृत मंच प्रदान कर रहा है। एक अत्यंत क्यूरेटेड और बिजनेस-केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में पहचाने जाने वाले इस शो ने वैश्विक सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। इस वर्ष प्रदर्शनी में 85 कंपनियों ने 110 बूथ्स के माध्यम से अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है, जिसमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, लैटिन अमेरिका, ओशिनिया, मिडिल ईस्ट एवं नॉर्थ अफ्रीका (MENA), रूस और सीआईएस क्षेत्र सहित 30 देशों के 230 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन का औपचारिक उद्घाटन सीमा शुल्क निवारक विभाग, नई दिल्ली के मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त श्री संजय गुप्ता ने किया। इस अवसर पर जयपुर के सीमा शुल्क आयुक्त श्री आर. के. चंदन, जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष श्री शौनक पारिख, क्षेत्रीय अध्यक्ष (राजस्थान) श्री योगेंद्र गर्ग, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के संयोजक श्री विजय मंगुकिया और कार्यकारी निदेशक श्री सब्यसाची राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री संजय गुप्ता ने कहा कि जीजेईपीसी वैश्विक मंच पर 'ब्रांड इंडिया' को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है और सीमा शुल्क विभाग व्यापार को सुगम बनाने तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाकर उद्योग के विकास पथ का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में श्री आर. के. चंदन ने विभाग को एक नियामक के बजाय व्यापार सुगमकर्ता बताते हुए जीजेईपीसी के प्रयासों की सराहना की।

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में इस शो की सफलता पर चर्चा करते हुए जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष श्री शौनक पारिख ने कहा कि 230 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की उपस्थिति भारत के प्रति अटूट विश्वास और लचीली आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण का प्रमाण है। वहीं, श्री योगेंद्र गर्ग ने जयपुर के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला, जहाँ स्रोत, निर्माण, प्रमाणन और व्यापार जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी उतनी ही उत्साहजनक रही; महामहिम किंग चार्ल्स के सुनार और हाउस ऑफ बेनी के सीईओ साइमन बेनी ने भारत-ब्रिटेन एफटीए के तहत शून्य टैरिफ के लाभों और भारतीय शिल्प कौशल, विशेषकर इनेमल वर्क और फिनिशिंग की सटीकता की जमकर प्रशंसा की। दक्षिण अफ्रीका की एस्मेरी डू प्लोय ने भी भारतीय डिजाइनरों द्वारा नए मटीरियल और फास्टनिंग मैकेनिज़्म के प्रयोगों को मौलिक और ताज़गी भरा करार दिया।

वित्त वर्ष 2024-25 में 28.7 अरब डॉलर के निर्यात और कुल व्यापारिक निर्यात में 7 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाला यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। आईजीजेएस जयपुर खरीदारों को हीरे, रंगीन रत्न, सोना, चांदी और लैब ग्रोन डायमंड जैसी श्रेणियों में सीधे निर्माताओं से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। जीजेईपीसी केवल आईजीजेएस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आईआईजेएस प्रीमियर, सिग्नेचर और तृतीया जैसे विश्व स्तरीय शो के साथ-साथ जेसीके लास वेगास, विसेंज़ाओरो और हांगकांग जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में 'इंडिया पवेलियन' के माध्यम से भारत की पहुंच बढ़ा रहा है। दुबई में आईजेईएक्स और सऊदी अरब में एसएजेईएक्स जैसे रणनीतिक उद्यमों के जरिए परिषद मध्य पूर्व जैसे उच्च क्षमता वाले बाजारों में नए द्वार खोल रही है, जिससे भारत रत्न और आभूषणों की सोर्सिंग के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित हो रहा है।

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