जयपुर, 16 जुलाई। "होम्योपैथी विश्वविद्यालय, जयपुर" का दीक्षांत समारोह गुरुवार को बिड़ला सभागार में आयोजित हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारत आरम्भ से ही चिकित्सा से जुड़ी महान ज्ञान परंपरा का केंद्र रहा है। उन्होंने होम्योपैथी को कारगर चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसमें अनुसंधान के आदर्श अपनाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि भारत में नैतिकता और ईमानदारी की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां नैतिकता, ईमानदारी खून में रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्ध सभी प्रभावी पद्धतियों को अपनाकर मानव स्वास्थ्य के लिए कार्य करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि लार्ड मैकाले ने भारत की ज्ञान परंपरा से दूर करने के उद्देश्य से अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का देश में प्रसार करवाया। उन्होंने पुणे के चिकित्सक डॉ. नामदोशी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एलोपैथी के चिकित्सक थे, लेकिन एक बार बीमार पड़ने के बाद उन्होंने होम्योपैथी से उपचार लिया और स्वस्थ हो गए। इसके बाद उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति को अपना लिया।

उन्होंने कहा कि रोग निदान में जो चिकित्सा पद्धति कारगर साबित हो, उसे अपनाने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद पांच हजार सालों से भी पुराना है और आज विश्वभर में उसका प्रचार-प्रसार हो रहा है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी दवाएं भी आयुर्वेद के कच्चे माल के अंतर्गत वनस्पति, फूल, पत्तों, उनकी जड़ों, खनिज पदार्थों के रस, अर्क और जहर से तैयार होती हैं।

राज्यपाल ने होम्योपैथी से जुड़े युवा चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने तुर्की शासक बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को जलाने की चर्चा करते हुए कहा कि आयुर्वेद के महान ज्ञान की विरासत को नष्ट करने के लिए उसने पुस्तकालय में आग लगवा दी थी। जली हुई पुस्तकों की आग तीन महीने तक सुलगती रही।

समारोह में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियां मानव को रोगमुक्त करने के साथ स्वस्थ जीवन जीने का मार्ग बताती हैं। उन्होंने देश की आयुष पद्धतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आज भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अग्रणी है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री ने होम्योपैथी को विश्व की सर्वाधिक स्वीकार्य पद्धति बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति की समग्र चिकित्सा पर आधारित है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अनुसंधान को आदर्श मानते हुए विकसित भारत के मजबूत आधार स्वस्थ भारत के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद और विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. मनोज राजोरिया एवं राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने डॉ. गिरेंद्रपाल को स्मरण करते हुए कहा कि होम्योपैथी का विश्व का पहला विश्वविद्यालय उनकी प्रेरणा से राजस्थान में स्थापित हुआ।

दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने विद्यार्थियों को दीक्षांत उपाधियां प्रदान कीं। इसके साथ ही चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। समारोह में होम्योपैथी शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story