सवाई माधोपुर। राजस्थान की वीर धरा और बाघों की शरणस्थली के रूप में विख्यात सवाई माधोपुर अब एक नई क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। जिले के 263वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में इस वर्ष न केवल बाघों का गर्जन सुनाई देगा, बल्कि अमरूद की मिठास सात समंदर पार तक अपनी पहचान बनाएगी। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि देश में पहली बार आयोजित हो रहा 'अमरूद महोत्सव' किसानों की आय दोगुनी करने और सवाई माधोपुर को अंतरराष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित होगा। 18 जनवरी से शुरू होने वाले इस भव्य आयोजन का शुभारंभ माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा, जो जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का संकल्प है।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस महोत्सव की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन हजारों पसीने बहाने वाले किसानों के सम्मान का पर्व है, जिनके परिश्रम से सवाई माधोपुर का अमरूद आज गुणवत्ता के मामले में देश की सीमाओं को लांघ रहा है। वर्तमान में जिला लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की खेती कर रहा है, जिससे प्रतिवर्ष करीब 4 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन प्राप्त होता है। 6 से 7 अरब रुपये के इस विशाल कारोबार को अब तक एक संगठित मंच की दरकार थी, जिसे 'अमरूद महोत्सव एवं उन्नत कृषि तकनीकी मेला–2026' के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। मंत्री ने अपने चुनावी वादे को याद करते हुए भावुक होकर कहा कि सवाई माधोपुर की मिट्टी की तासीर और यहाँ के किसानों की मेहनत को वैश्विक पहचान दिलाना उनका परम लक्ष्य है।

यह दो दिवसीय समागम आधुनिक खेती और परंपरागत मेहनत का एक अनूठा संगम होगा। महोत्सव के दौरान किसानों को स्मार्ट फार्मिंग, कृषि यंत्रीकरण और भविष्य की खेती कही जाने वाली ड्रोन तकनीक का जीवंत अनुभव मिलेगा। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता 'कृषक–वैज्ञानिक संवाद' और 'क्रेता–विक्रेता संगोष्ठी' होगी, जिसे डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने महोत्सव की 'आत्मा' करार दिया है। यहाँ देश भर की 20 से अधिक नर्सरियाँ और लगभग 200 स्टॉल्स के माध्यम से जैविक खेती, पशुपालन और डेयरी के नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे। बिचौलियों के जाल को काटकर किसानों को सीधे बाजार और निर्यातकों से जोड़ने की यह कवायद आने वाले बजट में विशेष प्रावधानों के साथ और अधिक सशक्त होगी, जिससे अमरूद से बनने वाले उत्पादों जैसे जैली, जूस, पल्प और बर्फी के प्रसंस्करण इकाइयों को बल मिलेगा।

समापन की ओर बढ़ते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रदेश के युवाओं और उद्यमियों का आह्वान किया कि वे 'पंच गौरव' की भावना से ओतप्रोत इस महोत्सव का हिस्सा बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब स्थानीय कौशल और आधुनिक तकनीक का मिलन होगा, तभी आत्मनिर्भर राजस्थान का सपना साकार होगा। यह महोत्सव सवाई माधोपुर को अमरूद उत्पादन और निर्यात के एक प्रमुख हब के रूप में विकसित करने की पहली ठोस ईंट है। अब सवाई माधोपुर की पहचान केवल बाघों से ही नहीं, बल्कि यहाँ के लजीज और रसीले अमरूदों की अंतरराष्ट्रीय धमक से भी होगी, जो भविष्य में क्षेत्र की समृद्धि का नया अध्याय लिखेगी।

Pratahkal Bureau

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