जयपुर में रचा गया इतिहास: ड्यूश बैंक और अक्षय पात्रा ने मिलकर परोसे 100 मिलियन मील, मिटाई मासूमों की भूख
जयपुर में ड्यूश बैंक और अक्षय पात्रा फाउंडेशन ने 100 मिलियन मिड-डे मील परोसने की ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया। सीईओ कौशिक शपारिया और श्रीधर वेंकट की मौजूदगी में इस साझेदारी ने पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों की भूख मिटाने और शिक्षा को बढ़ावा देने के संकल्प को दोहराया। जानिए कैसे इस पीपीपी मॉडल ने बदली करोड़ों मासूमों की जिंदगी।

जयपुर, 23 जनवरी 2026: राजस्थान की गुलाबी नगरी आज एक ऐसे मानवीय महाकुंभ की साक्षी बनी, जिसने न केवल आंकड़ों के शिखर को छुआ है, बल्कि करोड़ों सपनों को नई उड़ान दी है। एक साझा विजन और अटूट संकल्प का परिणाम है कि ड्यूश बैंक और अक्षय पात्रा फाउंडेशन ने मिलकर देश भर के स्कूली बच्चों को 100 मिलियन (10 करोड़) मिड-डे मील परोसने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। जयपुर में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में जब लाभार्थी बच्चे, समर्पित शिक्षक और स्वयंसेवी दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक मंच पर आए, तो माहौल केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उस भरोसे का था कि अब भूख कभी किसी बच्चे की कलम और किताब के बीच दीवार बनकर नहीं खड़ी होगी।
यह उपलब्धि केवल भोजन के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्लासरूम में व्याप्त भूख की समस्या के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध की जीत है। संस्थागत साझेदारी की यह एक ऐसी मिसाल है जो समावेशी शिक्षा के नए द्वार खोलती है। ड्यूश बैंक अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों के माध्यम से बीते कई वर्षों से अक्षय पात्रा के स्कूल लंच प्रोग्राम को मजबूती प्रदान कर रहा है। भारत सरकार की 'पीएम पोषण' योजना के साथ तालमेल बिठाते हुए इस साझेदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों तक पहुंचने वाला हर निवाला न केवल स्वच्छ और सेहतमंद हो, बल्कि उसमें वह पोषण भी हो जो एक विकसित मस्तिष्क और स्वस्थ शरीर की आधारशिला रखता है।
इस गौरवशाली क्षण पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ड्यूश बैंक ग्रुप इंडिया एंड एमर्जिंग एशिया के सीईओ कौशिक शपारिया ने कहा कि समाज पर सार्थक प्रभाव डालने के लिए सामूहिक प्रयास ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब दो दूरदर्शी संस्थाएं हाथ मिलाती हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। शपारिया के अनुसार, जरूरतमंद बच्चों को दिया गया हर भोजन उन्हें समाज में गरिमा के साथ जीने का अवसर और उज्जवल भविष्य की एक नई उम्मीद प्रदान करता है। उन्होंने संकल्प लिया कि अक्षय पात्रा के साथ मिलकर वे एक ऐसे कल का निर्माण कर रहे हैं जहां आर्थिक अभाव किसी की शिक्षा में बाधा नहीं बनेगा।
वहीं, अक्षय पात्रा फाउंडेशन के सीईओ श्रीधर वेंकट ने इस मील के पत्थर को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) की सबसे बड़ी सफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि ड्यूश बैंक के निरंतर और स्थिर सहयोग ने उनके संचालन को इतनी शक्ति प्रदान की है कि वे हर रोज हजारों स्कूलों तक निर्बाध रूप से पोषण पहुंचा पा रहे हैं। वेंकट ने ड्यूश बैंक और भारत सरकार के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विश्वास ही है जिसने एक ऐसी सशक्त प्रणाली को जन्म दिया है जो बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से लड़ने में सक्षम है।
यद्यपि देश निरंतर प्रगति कर रहा है, लेकिन आज भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कुपोषण शिक्षा के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। 'पीएम पोषण' योजना के अंतर्गत ड्यूश बैंक और अक्षय पात्रा की यह संयुक्त पहल राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। जयपुर के इस समारोह के अंत में दोनों संगठनों ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए यह संकल्प लिया कि इस कार्यक्रम की पहुंच को और अधिक विस्तार दिया जाएगा। यह साझेदारी अब केवल भोजन वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुकी है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि भारत का हर बच्चा अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बने।

Pratahkal Bureau
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