हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र में विश्व पर्यावरण दिवस पर महा-वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित
श्री कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आवास ग्रुप, अक्षय पात्र और कल्चर कैंप के बच्चों ने लिया भाग, गोवंश की सेवा कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प।

जयपुर के हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट, आवास ग्रुप और अक्षय पात्र के पदाधिकारियों के साथ एकत्र हुए कल्चर कैंप के बच्चे।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर जयपुर स्थित हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र में प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ एक भव्य महा-वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित इस प्रतिष्ठित केंद्र में पर्यावरण और जीव-जगत के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों ने एक मंच पर आकर इस अभियान को गति दी।
इस वृहद् आयोजन में आवास ग्रुप और अक्षय पात्र के समर्पित कर्मचारियों ने मुख्य भूमिका निभाते हुए परिसर में सघन वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुप्त वृन्दावन धाम में चल रहे कल्चर कैंप के बच्चे रहे, जिन्होंने इस महा-आयोजन में अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस विशेष अवसर पर जून माह में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्मदिन भी गौ माता के पावन सान्निध्य में बेहद अनूठे अंदाज में मनाया गया। बच्चों ने न केवल गौशाला का विस्तृत भ्रमण किया, बल्कि गौ माता को श्रद्धापूर्वक हरा चारा भी खिलाया। इस दौरान बच्चों को प्रकृति और मूक जीवों के प्रति संवेदनशील बनाने वाली विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा गया, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण में हरियाली और वृक्षों की अनिवार्य भूमिका के महत्व को आत्मसात कर सकें।
वर्तमान में 18,000 गोवंश की सेवा कर रहे हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से भावी पीढ़ी को पेड़ों को बचाने की शिक्षा दी गई। उपस्थित जनसमुदाय को भारतीय संस्कृति में पृथ्वी, जल, वृक्ष, पशु-पक्षी और गौ माता की सर्वोपरि महत्ता से अवगत कराया गया, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को सभी के लिए अविस्मरणीय बना दिया।
संस्था के उपाध्यक्ष रघुपति दास ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल पर्यावरण बचाने की औपचारिक शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके भीतर प्रकृति के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध समझाना भी परम आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि गौ सेवा, वृक्षारोपण, स्वच्छता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे जीवन-मूल्य और संस्कार बच्चों में बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए ताकि एक संतुलित समाज का निर्माण हो सके।

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