कैंसर उपचार में तकनीक का बड़ा बदलाव: AI और आधुनिक सर्जरी से बचेगी आवाज़, चेहरा भी रहेगा सुरक्षित
सिर और गर्दन के कैंसर के उपचार में AI, ट्रांसओरल रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक रेडिएशन तकनीकों ने नई उम्मीद जगाई है। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के डॉ. दीपांशु गुर्नानी ने बताया कि समय पर पहचान से न केवल इलाज की सफलता बढ़ती है, बल्कि आवाज़, चेहरा और जीवन की गुणवत्ता भी सुरक्षित रखी जा सकती है।

तस्वीर में नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी सर्जन डॉ. दीपांशु गुर्नानी नजर आ रहे हैं।
सिर और गर्दन के कैंसर के उपचार में आधुनिक तकनीक ने नए आयाम स्थापित किए हैं। पहले इस बीमारी का नाम सुनते ही मरीजों और उनके परिजनों के मन में आवाज़ चले जाने, चेहरे की बनावट बदल जाने या सामान्य जीवन प्रभावित होने का डर बैठ जाता था, लेकिन अब समय पर पहचान और उन्नत तकनीकों की मदद से मरीज की आवाज़, चेहरा और निगलने जैसी सामान्य क्षमताओं को सुरक्षित रखने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है।
जब भी सिर और गर्दन के कैंसर की बात होती है, तो सबसे पहले तंबाकू और शराब का जिक्र आता है। हालांकि अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। ऐसे कई मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी, हेड एंड नेक सर्जरी, डॉ. दीपांशु गुर्नानी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सिर और गर्दन के कैंसर के कारणों और मरीजों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, जिनमें पारंपरिक जोखिम कारक मौजूद नहीं होते।
डॉ. गुर्नानी बताते हैं कि उपचार के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव आया है। पहले इस तरह के कैंसर का इलाज आवाज़ खोने या चेहरे की बनावट प्रभावित होने जैसी आशंकाओं से जुड़ा माना जाता था, लेकिन आधुनिक तकनीकों के कारण समय पर बीमारी की पहचान होने पर मरीज की सामान्य शारीरिक क्षमताओं को सुरक्षित रखने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
मुंह और गले के कैंसर के मामलों में अब ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) भी एक महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है। यह वही वायरस है, जिसे पहले मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर से जोड़ा जाता था। HPV से होने वाला गले का कैंसर अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों और धूम्रपान नहीं करने वालों में भी देखा जा रहा है। राहत की बात यह है कि ऐसे कई मामलों में आधुनिक रेडिएशन और दवाओं का असर बेहतर होता है, जिससे उपचार के सफल होने की संभावना भी अधिक रहती है।
सिर और गर्दन के कैंसर के शुरुआती लक्षण हमेशा बड़े घाव या तेज दर्द के रूप में सामने नहीं आते। कई बार इसके संकेत इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार कान में दर्द होना, जबकि कान में कोई संक्रमण न हो, आवाज़ में भारीपन या बदलाव का दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहना, खाना निगलते समय दर्द होना या गले में कुछ फंसा होने जैसा महसूस होना, तथा मुंह का ऐसा छाला या घाव जो दो सप्ताह बाद भी ठीक न हो, ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉ. दीपांशु गुर्नानी का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो बिना देरी किए ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। उनका कहना है कि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज अधिक प्रभावी और कम जटिल हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अब उपचार का उद्देश्य केवल कैंसर को हटाना नहीं, बल्कि मरीज की जीवन-गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखना है। कुछ वर्ष पहले तक सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी का मतलब बड़े चीरे, चेहरे में बदलाव या आवाज़ खोने का खतरा माना जाता था, लेकिन अब डॉक्टर उपचार के साथ-साथ मरीज के सामान्य जीवन को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
ट्रांसओरल रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीक में बिना चेहरे या गर्दन पर बाहरी चीरा लगाए मुंह के रास्ते रोबोटिक तकनीक की सहायता से ट्यूमर निकाला जा सकता है। इससे दर्द कम होता है और मरीज की रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है।
इसी तरह वॉइस प्रिजर्वेशन थेरेपी के माध्यम से कई मरीजों में आधुनिक रेडिएशन और कीमोथेरेपी के उचित संयोजन से कैंसर का उपचार करते हुए उनकी आवाज़ को सुरक्षित रखा जा सकता है।
माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन तकनीक के तहत यदि सर्जरी के दौरान किसी हिस्से को निकालना आवश्यक हो, तो शरीर के दूसरे भाग से ऊतक और रक्त वाहिकाओं की सहायता से उसका पुनर्निर्माण किया जाता है। इससे मरीज के चेहरे की बनावट और उसकी कार्यक्षमता काफी हद तक सामान्य बनी रहती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी अब कैंसर उपचार में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सहायता कर रहा है। इसकी मदद से ट्यूमर की अधिक सटीक पहचान और मैपिंग संभव हो रही है। AI आधारित रेडिएशन प्लानिंग के जरिए किरणों को मुख्य रूप से ट्यूमर पर केंद्रित रखा जाता है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों, नसों और लार बनाने वाली ग्रंथियों को कम नुकसान पहुंचता है। इससे उपचार अधिक प्रभावी होने के साथ-साथ अधिक सुरक्षित भी बनता है।
डॉ. दीपांशु गुर्नानी के अनुसार आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, उन्नत रेडिएशन, AI आधारित उपचार योजना और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के सहयोग से आज कई मरीज न केवल कैंसर से सफलतापूर्वक उबर रहे हैं, बल्कि अपनी आवाज़, चेहरे की सामान्य बनावट और जीवन की गुणवत्ता भी पहले की तुलना में बेहतर ढंग से बनाए रख पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज सिर और गर्दन का कैंसर पहले की तरह डराने वाली बीमारी नहीं रह गया है। यदि इसका पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो उपचार के सफल होने की संभावना काफी अधिक होती है। इसलिए यदि गले, मुंह या कान से जुड़ी कोई भी असामान्य परेशानी दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार न केवल जीवन बचा सकता है, बल्कि मरीज की आवाज़, मुस्कान और आत्मविश्वास को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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