जयपुर, 14 अप्रैल। राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन, राजस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर व्यक्ति नहीं अपने आप में संस्था थे। उन्होंने देश को सामाजिक समरसता का मंत्र ही नहीं दिया बल्कि राष्ट्र सर्वोच्च है, यह दृष्टि भी हमें दी। वह संविधान और भारतीय संस्कृति में रचे-बसे मूल्यों से जुड़े महामना थे। उन्होंने कहा कि महामना वह होता है जो मनुष्य जैसा ही होते हुए भी अपने विचारों से और कर्म से जीते जी महानतम विचारों का आलोक देता है।

संविधान निर्माण और बाबा साहेब का वैश्विक दृष्टिकोण

राज्यपाल श्री बागडे ने कार्यक्रम के दौरान डॉ. अम्बेडकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि अपने अध्ययन का बहुत सारा समय डॉ. अम्बेडकर ने देश-दुनिया के कानूनों को जानने और समझने में ही व्यतीत किया था। इसी से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का महान संविधान हमें तैयार कर उन्होंने दिया। बाबा साहेब ने पूरा जीवन वंचित वर्ग के कल्याण को समर्पित किया था और बॉम्बे विधानसभा में वर्ष 1938 में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि — "मैं चाहता हूं कि समस्त लोग पहले भारतीय हों, और अंततः भारतीय हों तथा भारतीय के सिवाय और कुछ भी नहीं हों।"

राष्ट्रवाद और सामाजिक समानता का संदेश

राज्यपाल ने कहा कि बाबा साहेब ने राष्ट्र प्रथम की सोच हमें दी और कहा था कि राष्ट्र के हितों को सदा अग्रणी रखें। डॉ. अम्बेडकर के विचार वास्तविक रूप में उस राष्ट्रवाद से ही जुड़े हैं जिनमें व्यक्ति और व्यक्तियों के बीच जातियों, वर्णों, वर्गों, धर्मों में किसी तरह का कोई भेद नहीं है। उन्होंने शिक्षा और जागरूकता के लिए सदा काम किया। डॉ. अम्बेडकर ने "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो" का नारा दिया था जो आज भी प्रासंगिक है।

युगपुरूष की विकासवादी दृष्टि और आधुनिक भारत

श्री बागडे ने बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वह युगपुरूष थे। उन्होंने डॉ. अम्बेडकर द्वारा देश में रोजगार केंद्रों की स्थापना, दामोदर घाटी परियोजना, हीराकुंड परियोजना तथा सोन परियोजना आदि की स्थापना में रही महत्वपूर्ण भूमिका को स्मरण करते हुए उनकी उदात्त दृष्टि से सीख लेने का आह्वान किया। राज्यपाल ने पुनः दोहराया कि बाबा साहेब भारतीय संस्कृति में रचे—बसे मूल्यों से जुड़े महामना थे।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story