कौशल शिक्षा से राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
राज्यपाल ने विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कौशल विकास के साथ नैतिक शिक्षा और नई शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर जोर दिया।

जयपुर में बुधवार को आयोजित विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह के दौरान मंच से विद्यार्थियों को संबोधित करते राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने स्पष्ट कहा कि कौशल शिक्षा का उपयोग राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए, क्योंकि जिसके पास अच्छा कौशल होता है, उसे हर स्थान पर कार्य मिलता है और वह कभी भूखा नहीं रहता। उन्होंने विश्वविद्यालयों में कौशल शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों की शिक्षा से भौतिक विकास की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
राज्यपाल बुधवार को विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालयों में प्रति वर्ष दीक्षांत समारोह अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि भले ही समारोह छोटे स्तर पर हो, लेकिन नियमित रूप से होना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को समय पर डिग्री प्राप्त हो और उन्हें जीवन में स्पष्ट दिशा मिल सके।
श्री बागडे ने कहा कि प्रतिभाशाली राष्ट्र निर्माण के लिए विद्यार्थियों को कौशल विकास के साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें नकल की प्रवृत्ति से दूर रखने की शिक्षा देने पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने शिक्षकों को स्वयं को निरंतर अपडेट रखते हुए शिक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में अच्छे नागरिक निर्माण के साथ आदर्श आचरण पर विशेष बल दिया गया है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 2 फरवरी 1835 को लॉर्ड मैकाले के उद्बोधन में यह कहा गया था कि भारत को स्थायी रूप से गुलाम बनाए रखने के लिए उसकी शिक्षा पद्धति को बदलना होगा, और अंग्रेजों ने यही किया, जिससे देश लंबे समय तक गुलामी में रहा। राज्यपाल ने कहा कि आजादी से पहले देश में आठ लाख से अधिक गुरुकुल थे, जहां सभी प्रकार की शिक्षा दी जाती थी, लेकिन अंग्रेजों ने इस व्यवस्था को बदलकर गुलाम मानसिकता की शिक्षा लागू की।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद आचार्य विनोबा भावे ने भी यह सुझाव दिया था कि जिस प्रकार यूनियन जैक को हटाकर तिरंगा अपनाया गया, उसी प्रकार शिक्षा पद्धति में भी बदलाव होना चाहिए था, किंतु ऐसा नहीं हुआ। अब नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय परिप्रेक्ष्य में तैयार की गई है, जिसमें विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
राज्यपाल ने भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार बताते हुए उन्हें ब्रह्मांड का प्रथम इंजीनियर कहा। उन्होंने महान अभियंता एम. विश्वेश्वरैया को स्मरण करते हुए उनके अभियांत्रिकी कौशल और समय पालन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल विभाग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सीखने के दायरे को सीमित न रखें। उन्होंने युवाओं को सृजनात्मक बने रहने, निरंतर सीखते रहने और अपने कौशल से दुनिया को बदलने की दिशा में कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने पीयूष पांडे का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जीवन में जो देखते थे, उसे याद रखते और उत्कृष्ट रचना करते थे। उन्होंने युवाओं को उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, स्वयं को निरंतर आगे बढ़ाने और वैश्विक परिवर्तनों के अनुरूप ढलते हुए सफलता प्राप्त करने का आह्वान किया।
विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देवस्वरूप ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। समारोह से पूर्व विश्वविद्यालय पर आधारित एक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डिग्री और पदक प्रदान किए।
यह दीक्षांत समारोह कौशल शिक्षा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा नीति के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरकर सामने आया।

Pratahkal Bureau
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