राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आगरा में अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय सम्मेलन का शुभारंभ किया
राजस्थान के राज्यपाल ने 'केंद्रीय हिंदी संस्थान ज्ञानकोश' का ऑनलाइन उद्घाटन किया और सभ्यता के विकास में पुस्तकों तथा डिजिटल लाइब्रेरी की महत्ता पर जोर दिया।

आगरा में केंद्रीय हिंदी संस्थान और भारतीय पुस्तकालय संघ के सम्मेलन में "केंद्रीय हिंदी संस्थान ज्ञानकोश" का ऑनलाइन शुभारंभ करते राज्यपाल हरिभाऊ बागडे।
जयपुर, 5 फरवरी । राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पुस्तकें सभ्यता और संस्कृति की उन्नति का सबसे बड़ा मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ी पुस्तकें केवल छपी हुई सामग्री रूप में ही नहीं डिजिटल माध्यमों में देश या समाज की सामूहिक चेतना और प्रतिभा का प्रतिबिम्ब बनती जा रही है। उन्होंने युगानुरूप प्राचीन पुस्तकों और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए वृहद स्तर पर कार्य किए जाने का आह्वान किया।
---अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और डिजिटल पहल
- राज्यपाल श्री बागडे गुरुवार को आगरा में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा और भारतीय पुस्तकालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में पुस्तकालय सेवाओं का रूपान्तरण’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।
- उन्होंने इस अवसर पर "केंद्रीय हिंदी संस्थान ज्ञानकोश" का ऑनलाइन शुभारंभ किया।
ऐतिहासिक संदर्भ और ज्ञान विरासत पर प्रहार
उन्होंने भारत से जुड़ी ज्ञान विरासत की चर्चा करते हुए कहा कि विदेशी आक्रान्ताओं ने हमारे समृद्ध पुस्तकालयों को नष्ट करने की सुनियोजित सोच से कार्य किया। "बारहवी शताब्दी में बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को इसलिए जला दिया कि भारत के समृद्ध ज्ञान को नष्ट किया जा सके।"
राज्यपाल ने कहा कि दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों के गायब होने की घटनाएं यह बताती है कि कैसे ज्ञान और बौद्धिक विरासत को नष्ट करने के प्रयास किए जाते हैं।
---प्राचीनतम ग्रंथ और संरक्षण की तकनीक
"भारत ही वह देश रहा है जहां पर विश्व का सबसे पहला और प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद लिखा गया। आज भी पूरा विश्व यह मानता है कि प्रथम उपलब्ध ग्रंथ यही था।" अनेक ऋषियों ने इस वेद को कंठ दर कंठ आगे की पीढ़ी को सुनाकर सहेजा और बाद में इसे लिपिबद्ध किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि अब इस तरह तकनीक का विकास हो गया है कि हमेशा हमेशा के लिए पुस्तकों को सुरक्षित करने की दिशा में कार्य हो सके। उन्होंने देश में राष्ट्रपति द्वारा ’वन नेशन, वन डिजिटल लाइब्रेरी’ की सोच को ऐतिहासिक बताते हुए भारतीय प्राचीन ग्रंथों के अनुवाद की संस्कृति पर भी कार्य किए जाने पर जोर दिया।
---अनुवाद और शिक्षा पद्धति में सुधार
- उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत, पांडुलिपियों और महत्वपूर्ण पुस्तकों को संरक्षित करने के लिए पठनीय भाषाओं में अधिक से अधिक अनुवाद किया जाए।
- राज्यपाल ने कहा कि हमारी शिक्षा परम्परा को ब्रिटिश सरकार ने रोजगार से जोड़ दिया।
- पुस्तकें पढ़कर पास होने की यह प्रवृति पुस्तकों को रटने से जुड़ गई, जिससे बौद्धिक क्षमता का बहुत नुकसान हुआ।
जबकि भारत ज्ञान की समृद्ध उस पुस्तक परम्परा से आरंभ से जुड़ा रहा है जहां पुस्तकों का अध्ययन रटना नहीं होता था बल्कि उससे अपने आपको विकसित करना होता था। इसीलिए हमारे यहां पुस्तकों से विचार संस्कृति का विकास हुआ।
"पुस्तकें सभ्यता और संस्कृति की उन्नति का सबसे बड़ा मार्ग- राज्यपाल"

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