राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जोधपुर पुलिस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
राज्यपाल ने शिक्षा को समाज सेवा का माध्यम बताते हुए पुलिसिंग में मानवीय मूल्यों और साइबर सुरक्षा दक्षता पर जोर दिया।

जोधपुर के सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे।
सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर में आयोजित चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने दीक्षांत को शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि विद्यार्थी जीवन के नव आरंभ का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के हित में समर्पित करना ही दीक्षांत का मूल उद्देश्य है।
राज्यपाल श्री बागडे ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां प्राप्त शिक्षा को व्यवहार में उतारने का संकल्प लिया जाता है। प्राचीन गुरुकुल परंपरा के ‘समावर्तन संस्कार’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सत्य, धर्म और विनम्रता के साथ जीवन में आगे बढ़ना है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को समाज को समर्पित करें तथा नागरिकों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था, अपराधों की रोकथाम एवं न्याय की रक्षा के प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश में पुलिसिंग अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, जहां साइबर अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों का प्रसार और सामाजिक असंतुलन जैसी चुनौतियां सामने हैं। ‘जन सेवा ही परम धर्म’ की भावना के साथ कार्य करते हुए तथा जनता को मित्र मानकर ही पुलिस अपनी सकारात्मक छवि स्थापित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति है।
राज्यपाल ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के महत्व पर बल देते हुए कहा कि डेटा एनालिटिक्स, फोरेंसिक एवं साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दक्षता आवश्यक है, किन्तु इसके साथ मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व देना चाहिए। सरदार पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की एकता एवं अखंडता सर्वोपरि है और विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण का आधार है। लक्ष्य निर्धारण, एकाग्रता और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने भौतिक विकास के साथ नैतिक विकास को भी आवश्यक बताया।
राज्यपाल ने कहा कि पुलिस की सकारात्मक छवि निर्माण की जिम्मेदारी युवाओं पर है और केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि समाज का विश्वास अर्जित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय के क्षेत्र में किए जा रहे शिक्षण एवं अनुसंधान कार्यों की सराहना की तथा भारतीय परिप्रेक्ष्य आधारित पाठ्यक्रम एवं शोध को बढ़ावा देने पर बल दिया।
विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय धर्म की जड़ है और सेवा राष्ट्र का प्राण। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संकल्प दिवस बताते हुए विद्यार्थियों से राष्ट्र सेवा, न्याय एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है तथा व्यवहारिक एवं शोध आधारित शिक्षा प्रदान कर रहा है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से अपेक्षा जताई कि वह पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा एवं फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में मौलिक एवं शोध आधारित कार्यों को बढ़ावा देकर देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में विवेक, संवेदनशीलता, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का विकास करना है, जो राष्ट्र निर्माण का आधार है। इस अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं को डिग्री एवं पदक प्रदान किए। समारोह ने शिक्षा, सेवा और न्याय के समन्वय से सशक्त राष्ट्र निर्माण का स्पष्ट संदेश दिया।

Pratahkal Bureau
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