जयपुर। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कला साहित्य एवं संस्कृति विभाग की उप शासन सचिव डॉ. अनुराधा गोगिया ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ज्ञान भारतम् मिशन पांडुलिपि सर्वे की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान के समस्त जिला नोडल अधिकारियों को प्राचीन ग्रंथों एवं पाण्डुलिपियों के सर्वे कार्य में अभूतपूर्व प्रगति लाने के कड़े निर्देश प्रदान किए गए। मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सुनियोजित नियोजन और कार्यान्वयन के तहत समस्त जिला नोडल अधिकारियों को संस्कृत विषय से संबंधित विशेषज्ञ सर्वेयर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। ये सर्वेयर प्रदेश के विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों, निजी संस्थाओं और व्यक्तिगत पांडुलिपि धारकों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अमूल्य निधि का दस्तावेजीकरण करेंगे। जन जागरूकता बढ़ाने के लिए "हर घर दस्तक" जैसे सघन अभियानों को गति दी जा रही है, जिसमें आम जनता का भी भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है।

ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत विकसित विशिष्ट मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिक अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों की सूचना स्वयं दर्ज कर सकेंगे, जिससे इन प्राचीन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संग्रहित करना सुगम होगा। वर्तमान में राजस्थान संस्कृत अकादमी के सरकारी मुख्य क्लस्टर केंद्र सहित प्रदेश में कुल दो मुख्य क्लस्टर और तीन स्वतंत्र केंद्र इस मिशन को धरातल पर उतारने हेतु नामित किए गए हैं। राज्य नोडल अधिकारी डॉ. लता श्रीमाली ने बैठक में गौरवशाली आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राजस्थान अब तक 16,66,917 लाख से अधिक पांडुलिपियों के सर्वे के साथ पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर है, साथ ही 7,07,729 पेजों के डिजिटाइजेशन के कार्य में भी प्रदेश अन्य राज्यों से कहीं आगे निकल चुका है। इस महाअभियान के तहत संस्कृत, अरबी, फारसी, प्राकृत, पाली और अपभ्रंश जैसी विविध भाषाओं में रचित आयुर्वेद, इतिहास, विज्ञान, ज्योतिष, धर्म शास्त्र और गणित विषयों की पांडुलिपियों का संरक्षण किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि पांडुलिपियों का वास्तविक स्वामित्व मूल धारक के पास ही सुरक्षित रहेगा।

आगामी चरणों में इन डिजिटल पांडुलिपियों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लिपि विशेषज्ञों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा, जिससे वेदों, उपनिषदों और पुराणों का गूढ़ ज्ञान जन-जन को उनकी मातृभाषा में उपलब्ध हो सकेगा। यह पहल शोधार्थियों के लिए रिसर्च के नए द्वार खोलेगी। सर्वे के दौरान तांबे के पत्रों, भोजपत्रों और कपड़ों पर अंकित अमूल्य पांडुलिपियों के साथ-साथ विभिन्न समाजों व राजवंशों की वंशावलियां भी प्रकाश में आ रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के अक्षय भंडार के रूप में मील का पत्थर साबित होंगी।

Pratahkal Newsroom

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