गुरसरांय में श्रीमद्भागवत कथा का सुदामा चरित्र प्रसंग के साथ समापन
ग्राम भस्नेह में आयोजित विष्णु महायज्ञ के अंतिम दिन राष्ट्रीय कथा वाचक पं. ब्रजेश त्रिपाठी शास्त्री ने सुदामा के संतोष रूपी धन और भक्ति मार्ग की महिमा बताई।

गुरसरांय के ग्राम भस्नेह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर राष्ट्रीय कथा वाचक पं. ब्रजेश त्रिपाठी शास्त्री (बाएं) और उनके साथ उपस्थित अन्य व्यक्ति।
गुरसरांय के ग्राम भस्नेह स्थित शिवालय सरकार परिसर में आयोजित विष्णु महायज्ञ के अंतर्गत चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन सुदामा चरित्र के भावपूर्ण प्रसंग के साथ हुआ। अंतिम दिन कथा में भगवान श्रीकृष्ण के परम सखा सुदामा जी के जीवन प्रसंगों का मार्मिक वर्णन करते हुए राष्ट्रीय कथा वाचक पं. ब्रजेश त्रिपाठी शास्त्री ने कहा कि सुदामा जी परम संतोषी ब्राह्मण थे और जो व्यक्ति संतोषी होता है, वही वास्तविक अर्थों में धनवान होता है। उन्होंने कहा कि सुदामा जी को दरिद्र कहना उचित नहीं, क्योंकि उनके पास संतोष रूपी सबसे बड़ा धन था।
पं. ब्रजेश त्रिपाठी शास्त्री ने कहा कि यदि विवेक की दृष्टि खुली हो तो व्यक्ति कहीं से भी शिक्षा प्राप्त कर सकता है, लेकिन दीक्षा केवल एक गुरु से ही लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कलयुग में हरी नाम संकीर्तन ही मुक्ति का सबसे प्रभावी साधन है। भक्ति और ज्ञान मार्ग दोनों भगवान की प्राप्ति के साधन हैं, लेकिन भक्ति मार्ग सबसे सरल और सुलभ माना गया है।
कथा के समापन अवसर पर प्रस्तुत भजनों ने पूरे पांडाल को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान ऑर्गन पर बीरेन्द्र सिंह, तबले पर धर्मेंद्र कौशिक तथा पैड पर नीलू एवं आनंद ने संगत कर वातावरण को संगीतमय बनाया।
विष्णु महायज्ञ का आयोजन यज्ञाचार्य पं. गणेश दत्त शास्त्री के संयोजन में संपन्न हुआ। वैदिक पंडित देवेंद्र शास्त्री, हृदेश कटारे, सुदीप पटेरिया, आनंद स्वरूप दुवे एवं सतीश मिश्रा ने विधि-विधान के साथ यज्ञ का शुभारंभ कराया। यज्ञ का पूजन मुख्य यजमान राजू सिंह परमार एवं सहयोगी यजमानों द्वारा संपन्न किया गया। भागवत कथा का मूल पाठ आचार्य हरेंद्र गौतम ने किया।
गुरसरांय नगर आगमन पर समाजसेवी मेजर अखिलेश पिपरैया ने कथा व्यास पं. ब्रजेश त्रिपाठी शास्त्री का अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान किया। भागवत कथा की आरती परीक्षित श्रीमती रेखा अखिलेश कनकने ने उतारी।
इस अवसर पर सुखदेव सिंह दीपू अस्ता, द्वारिका प्रसाद पटेरिया, लाखन सिंह, भारतेंदु बुंदेला सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में भक्ति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित किया।

Pratahkal Bureau
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