अभिनेता गुलशन ग्रोवर ने शेफ अरुण चौहान को किया सम्मानित, मिला नेशनल अवॉर्ड
नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में राजस्थानी व्यंजनों पर शोध के लिए शेफ अरुण चौहान को कलनरी आर्ट सम्मान दिया गया।

जयपुर। पाक कला के क्षेत्र में राजस्थानी पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण और उन पर गहन शोध के माध्यम से स्थानीय खान-पान को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने वाले मास्टर शेफ अरुण चौहान को प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गुलशन ग्रोवर ने नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में अरुण चौहान को कलनरी आर्ट (पाक कला) में उनके अभूतपूर्व और विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
यह गौरवशाली कार्यक्रम वर्ल्ड कल्चरल एंड एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन, भारत सरकार के नीति आयोग एवं यूनाइटेड नेशन्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस गरिमामयी अवसर पर मास्टर शेफ अरुण चौहान ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कविता चौहान के साथ अभिनेता गुलशन ग्रोवर, दिल्ली निगम ग्रामीण क्षेत्र के चेयरमैन योगेश राणा तथा भाजपा महामंत्री नीरू पार्चा के कर-कमलों से यह सम्मान प्राप्त किया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें शॉल ओढ़ाकर, मेडल और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके कौशल की सराहना की गई।
विगत 25 वर्षों से देश के विभिन्न प्रतिष्ठित होटलों, रिसॉर्ट्स और बड़े रेस्टोरेंट ग्रुप्स में अपनी सेवाएं दे चुके मास्टर शेफ अरुण चौहान वर्तमान में अजमेर स्थित आना सागर चौपाटी के "बाजरो रेस्टोरेंट" और "ओएस्टर फूड लाउंज" में एक्जीक्यूटिव शेफ के पद पर कार्यरत हैं। इंडियन, कॉन्टिनेंटल, थाई, इटालियन और जैपनीज व्यंजनों में विशेषज्ञता रखने के बावजूद, उनका मुख्य उद्देश्य लुप्त हो रही राजस्थानी रेसिपीज को पुनर्जीवित करना है।
अपनी इस उपलब्धि पर विचार साझा करते हुए शेफ अरुण चौहान ने कहा कि पाक कला मात्र भोजन तैयार करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्थान के प्रत्येक क्षेत्र का खान-पान वहां की जलवायु, मिट्टी और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। शोध के माध्यम से इन स्थानीय सामग्रियों और पारंपरिक विधियों को संरक्षित करना अनिवार्य है ताकि भावी पीढ़ियां अपनी समृद्ध विरासत के स्वाद से वंचित न रहें। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का फल है, बल्कि राजस्थानी संस्कृति और पारंपरिक खान-पान के प्रति बढ़ते वैश्विक सम्मान का भी प्रतीक है

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