जयपुर/चित्तौड़गढ़, 23 दिसंबर। मेवाड़ की शौर्यभूमि चित्तौड़गढ़ में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव का भव्य उद्घाटन हुआ, जिसमें राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान करते हुए उपस्थित जनसमूह को स्वदेशी का संकल्प दिलाया। राज्यपाल ने कहा कि भारतीयों के स्वाभिमान के बढ़ने पर ही स्वदेशी भावना सशक्त होगी और स्वदेशी से ही आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।

सुभाष चौक से इंदिरा गांधी स्टेडियम तक निकली रंग-बिरंगी शोभायात्रा ने पूरे शहर को स्वदेशी के उत्सव रंग में रंग दिया। उद्घाटन समारोह में राज्यपाल श्री बागडे ने जोर देकर कहा कि स्वदेशी के माध्यम से विदेशी वस्तुओं के गुणवत्तापूर्ण, सस्ते और टिकाऊ विकल्प प्रस्तुत कर विदेशी कंपनियों के वर्चस्व को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने अपने भाषण में देश के गौरवशाली इतिहास और मेवाड़ की वीरता का स्मरण कराते हुए कहा कि रावलपिंडी और तक्षशिला जैसी विरासतें हमारी गौरवशाली धरोहर हैं, और रावलपिंडी का नाम चित्तौड़गढ़ के महानायक बप्पा रावल के नाम पर पड़ा है।

राज्यपाल ने बताया कि भारत आज विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। एक समय था जब देश को गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज 140 करोड़ जनता का पेट भरने के बाद भी हम अनाज का निर्यात कर पा रहे हैं। यह स्वदेशी की ताकत का प्रमाण है। उन्होंने 1905 में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के 120 वर्ष पूरे होने का स्मरण कराते हुए कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व भारतवासियों द्वारा कपास से बने कपड़े का उपयोग कर स्वदेशी का उद्घोष किया गया था, और आज भी यह भावना प्रासंगिक है।

अपने भाषण में राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियों का उल्लेख किया, जिसमें चित्तौड़गढ़ के जौहर, त्याग और अमर बलिदान का स्मरण है। उन्होंने कहा कि यह अमर जौहर की आग आज भी चित्तौड़ की मिट्टी, उसकी रग-रग और जन-जन के संस्कारों में जीवित है।

स्वागत उद्बोधन में स्थानीय सांसद चंद्र प्रकाश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी के प्रति समर्पण और प्रेरणा का मूर्त रूप ही चित्तौड़गढ़ में आयोजित यह स्वदेशी महोत्सव है। उन्होंने छह दिवसीय इस आयोजन को स्वदेशी भावना को समर्पित बताते हुए कहा कि स्वदेशी से आत्मनिर्भर बनने के मंत्र के साथ भारत आज विश्व पटल पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है।

यह महोत्सव न केवल स्वदेशी उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने का अवसर है, बल्कि यह देशवासियों में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को जागृत करने की प्रेरक पहल भी साबित हो रहा है।

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