कोटा में राज्यपाल श्री बागडे का आह्वान: डिग्रियां केवल कागज नहीं, विकसित भारत के निर्माण का अस्त्र बनें
कोटा विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने 80,117 उपाधियों का वितरण किया। बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इस समारोह में राज्यपाल ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी प्रदाता बनने के लिए प्रेरित किया। जानिए इस भव्य आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

कोटा / जयपुर। शिक्षा नगरी कोटा में आज ज्ञान और ऊर्जा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला, जब बसंत पंचमी के पावन अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन हुआ। सिआम ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने युवाओं के भीतर राष्ट्रभक्ति की अलख जगाते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल सूचनाओं का संचय करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का संचार कर उसे एक आदर्श मनुष्य बनाना है। बसंत पंचमी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती के दोहरे संयोग ने इस पूरे आयोजन को वैचारिक रूप से और भी ऐतिहासिक बना दिया।
राज्यपाल श्री बागडे ने दीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीयों की प्रतिभा का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। उन्होंने पदक और उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी इस योग्यता का उपयोग राष्ट्र निर्माण के महान यज्ञ में करें। कुलाधिपति ने जोर देकर कहा कि वही समाज और राष्ट्र उन्नति के शिखर को छूता है, जहाँ शिक्षा का निरंतर प्रसार होता है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) के संदर्भ में कहा कि व्यक्तित्व का उत्कर्ष तभी संभव है जब विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ जीवन के व्यवहारिक ज्ञान से भी जोड़ा जाए, क्योंकि शिक्षा का मूल उद्देश्य सर्वांगीण विकास है।
विश्वविद्यालय के आचार्यों और शिक्षकों को मार्गदर्शित करते हुए राज्यपाल ने नवाचारों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को शोध की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए और विद्यार्थियों के साथ एक फीडबैक मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए ताकि शिक्षण प्रक्रिया में उत्साह बना रहे। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वाधीनता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नमन करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में उतारने की बात कही।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने विद्यार्थियों के भीतर 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि अपने कौशल और स्टार्टअप के माध्यम से 'जॉब गिवर' (नौकरी देने वाले) बनकर विकसित भारत के सपने को साकार करें। ऊर्जा मंत्री ने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अपने मूल विश्वविद्यालय से सदैव भावनात्मक जुड़ाव रखने की भी सलाह दी।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों का लेखा-जोखा साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्यपाल के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए चतुर्थ चरण में पचेल कला और हनोतिया गांवों को गोद लिया है, जिनके सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस 12वें दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 80,117 उपाधियों का वितरण किया गया, जो क्षेत्र की शैक्षणिक प्रगति का जीवंत प्रमाण है। यह दीक्षांत समारोह न केवल डिग्रियां बांटने का उत्सव रहा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए नए संकल्पों और नई दिशाओं का प्रस्थान बिंदु भी साबित हुआ।

Pratahkal Bureau
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