यज्ञ जीवन और मानवता का आलोक पथ: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उदयपुरवाटी के बालाजी धाम में आयोजित भव्य श्रीराम महायज्ञ में आहुति देकर मानवता के कल्याण का संदेश दिया। जानिए क्यों राज्यपाल ने रामायण और महाभारत को विश्व का अनोखा ग्रंथ बताते हुए प्रभु राम के जीवन दर्शन को अपनाने पर विशेष बल दिया।

तस्वीर में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने उदयपुरवाटी के पचलंगी स्थित बालाजी धाम झडाया में आयोजित श्रीराम महायज्ञ में वैदिक विधि से आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की।
जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे मंगलवार को उदयपुरवाटी के पचलंगी स्थित बालाजी धाम झडाया में श्रीराम महायज्ञ सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य महायज्ञ में सम्मिलित हुए। राज्यपाल ने इस पावन अवसर पर महायज्ञ में पूर्ण विधि-विधान के साथ आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन और मानवता का आलोक पथ है, जिससे न केवल तन, मन और जीवन सिद्ध होता है, बल्कि संपूर्ण मानवता का कल्याण सुनिश्चित होता है।
राज्यपाल सचिवालय लोक भवन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्यपाल श्री बागडे ने भारतीय संस्कृति और दर्शन की समृद्ध विरासत पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने रामायण एवं महाभारत को विश्व के सबसे अनोखे और अद्वितीय ग्रंथ बताते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के अनुकरणीय जीवनी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने उपस्थित आमजन से भारतीय दर्शन की महत्ता को समझने और प्रभु श्री राम के आदर्शों, जीवन मूल्यों, सत्य, सेवा तथा त्याग के संदेशों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने का पुरजोर आग्रह किया।
इस धार्मिक आयोजन के आधिकारिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि श्रीराम महायज्ञ सनातन वैदिक परंपरा का एक अत्यंत पवित्र, उत्कृष्ट एवं पुण्यदायी अनुष्ठान है। यह आयोजन पूरी तरह से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, धर्म और लोककल्याण की उच्च लोक-भावना को समर्पित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महायज्ञ के माध्यम से समाज में धर्म, सत्य और सदाचार के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा, जो वर्तमान समय में सामाजिक समरसता और नैतिक उत्थान के लिए अत्यंत प्रासंगिक और दूरगामी सिद्ध होगा।

