राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सनातन धर्म को बताया दुनिया का सबसे पुराना धर्म
नोखा के मूलवास-सीलवा में विराट हिंदू सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने प्राचीन शिक्षा पद्धति और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया।

बीकानेर के नोखा में आयोजित विराट हिंदू सभा के दौरान मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे।
जयपुर/बीकानेर, 28 फरवरी। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सनातन धर्म, दुनिया का सबसे पुराना और समृद्ध धर्म है। इसे संरक्षित रखना और संवर्धित करना हम सभी का दायित्व है। राज्यपाल श्री बागडे शनिवार को नोखा के मूलवास-सीलवा के संत दुलाराम कुलरिया फलसा स्थित नरसी विला में आयोजित विराट हिंदू सभा को संबोधित कर रहे थे।
सनातन धर्म और ऋषि-मुनियों का योगदान
राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में कहा कि "सनातन धर्म, हजारों वर्ष पुराना धर्म है। इस धर्म का पालन करना हम सभी का कर्त्तव्य है।" उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि "सनातन धर्म हमें जीव मात्र पर दया का भाव सिखाता है। हमारे साधु, संत और ऋषि-मुनि इस धर्म और संस्कृति से उपदेश देकर, इसे पल्लवित कर रहे हैं। जबकि दुनिया के कई धर्म और संस्कृतियां लगातार लुप्त हो रही हैं।"
विदेशी आक्रमण और प्राचीन शिक्षा पद्धति पर प्रहार
धर्म सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने ऐतिहासिक संघर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि "हमारे सनातन धर्म को प्रभावित करने के हजारों वर्षों तक प्रयास हुए। अनेक विदेशी आक्रांताओं ने इस पर आक्रमण किए, लेकिन हमारा सनातन धर्म हर बार अधिक मजबूत हुआ।" शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि "आज से सदियों पूर्व हमारे देश में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। गांव-गांव में गुरुकुल थे, जो व्यक्ति निर्माण का काम करते थे। अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा प्रणाली पर हमला किया। अंग्रेज मानते थे कि भारत को गुलाम बनाना है, तो इसकी शिक्षा पद्धति को ध्वस्त करना जरूरी है।"
सांस्कृतिक क्षरण और स्वर्णिम गौरव की वापसी
वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने सचेत किया कि "दुर्भाग्य से आज हम, हमारे धर्म और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। यह हमारे लिए नुकसानदायक है। संस्कृति के इस क्षरण को रोकना जरूरी है।" उन्होंने राष्ट्र के भविष्य के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि "देश को अपना स्वर्णिम गौरव फिर से लौटाना है, तो इसमें सनातन धर्म की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।"
धर्म ध्वजा स्थापना और लोकार्पण समारोह
इस अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के सान्निध्य में नरसी विला के मुख्य द्वार पर आयोजित कार्यक्रम में मां भारती प्रतिरूप और धर्म ध्वजा स्थापना का लोकार्पण किया।

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