जयपुर। लोकभवन, राजस्थान में आज ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने "एक भारत श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम के अंतर्गत आईआईआईटी धारवाड़, कर्नाटक के विद्यार्थियों के साथ एक भावपूर्ण और बौद्धिक संवाद किया। यह संवाद केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत से जोड़कर एक विकसित भारत के संकल्प की दिशा में प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम बन गया।

संवाद के दौरान राज्यपाल श्री बागडे ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए प्राचीन भारत की उस शैक्षणिक उत्कृष्टता को रेखांकित किया, जिसने कभी पूरी दुनिया को दिशा दिखाई थी। उन्होंने विद्यार्थियों को स्मरण कराया कि प्राचीन काल में भारत की सीमाएं आज की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत थीं, जिसमें अफगानिस्तान, गांधार, कंबोज, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे क्षेत्र सम्मिलित थे। राज्यपाल ने गर्व के साथ बताया कि विश्व के सर्वाधिक 19 विश्वविद्यालय उस समय केवल भारत भूमि पर ही सुशोभित थे, जहां सुदूर देशों से विद्यार्थी ज्ञानार्जन के लिए खिंचे चले आते थे। उन्होंने बप्पा रावल के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए रावलपिंडी के नामकरण के पीछे के तथ्य को साझा किया, जो भारतीय इतिहास की व्यापकता को दर्शाता है।

राज्यपाल ने वर्तमान पीढ़ी को नई शिक्षा नीति की प्रासंगिकता समझाते हुए कहा कि यह नीति युवाओं को उनके प्राचीन गौरव से अवगत कराते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कर्नाटक से आए विद्यार्थियों को राजस्थान की वीर गाथाओं से परिचित कराते हुए आदिवासी क्षेत्र की वीरांगना कालीबाई के स्वाधीनता संग्राम में दिए गए अप्रतिम योगदान पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजस्थान के भौगोलिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहरों की चर्चा करते हुए सरदार सरोवर परियोजना से नर्मदा जल के राजस्थान में आगमन, विश्व की सबसे बड़ी पक्की नहर 'गंग नहर' के इतिहास और चित्तौड़गढ़ दुर्ग की वीरतापूर्ण विरासत के बारे में विद्यार्थियों को रोचक जानकारियां दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी भी उपस्थित रहे।

यह संवाद इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भारत अपनी संस्कृति और परंपराओं में आदिकाल से ही श्रेष्ठ रहा है और आज के तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं पर ही इस गौरव को पुनः पुनर्स्थापित करने का दारोमदार है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि "एक भारत श्रेष्ठ भारत" का मूल उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़कर उन्हें प्रतिभासंपन्न बनाना है, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सकें।

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Pratahkal Newsroom

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