राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दौसा में 31 साहित्यकारों को किया सम्मानित, साहित्य को बताया समाज का पथप्रदर्शक
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दौसा में आयोजित अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित 31 साहित्यकारों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने साहित्य को समाज का पथप्रदर्शक बताया और आधुनिक साहित्यकारों को विकृत इतिहास सुधारने व नई संस्कृति स्थापित करने का आह्वान किया।

जयपुर/दौसा, 20 दिसंबर। साहित्य समाज की दिशा तय करने वाला प्रकाशस्तंभ है और यह समाज में व्याप्त बुराइयों और रूढ़ियों को दूर करने का माध्यम है। यह बात राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को दौसा जिले के लालसोट में अशोक शर्मा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में कही। समारोह के अवसर पर राज्यपाल ने विभिन्न राज्यों से चयनित 31 साहित्यकारों को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
राज्यपाल श्री बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण है। यह समाज को सोचने पर मजबूर करता है और नई दिशा एवं सोच प्रदान करता है। उन्होंने कबीर और रहीम के साहित्य को उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनके काव्य एवं संदेश समाज सुधार और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में मार्गदर्शक हैं। मैथिली शरण गुप्त और वाल्मीकि जैसे साहित्यकारों के योगदान का भी उन्होंने स्मरण किया, जिन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज में सुधार और चेतना का संचार किया।
राज्यपाल ने देश की आजादी से पहले लिखे गए विकृत ऐतिहासिक तथ्यों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और आधुनिक साहित्यकारों को जिम्मेदारी देते हुए कहा कि ऐसे इतिहास को खोजकर सही रूप में प्रस्तुत करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने साहित्यकारों को नए साहित्य और नई संस्कृति की दिशा देने का आह्वान भी किया।
इसके अतिरिक्त, राज्यपाल ने शिक्षा के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा पिछड़े, जनजातीय और घुमंतू वर्ग के लोग समान अवसरों पर पहुँच सकते हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति को देश में समान अवसर और प्रगति के लिए सहायक बताया। श्री बागडे ने कहा कि भारत विश्व गुरु की भूमिका निभा रहा है, जिसे 29 देशों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदान किए गए सर्वोच्च सम्मान से भी परिलक्षित किया जा सकता है।
अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह के 31 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में साहित्यकारों को सम्मानित कर साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। यह कार्यक्रम न केवल साहित्यिक उत्कृष्टता को मान्यता देता है, बल्कि समाज में नैतिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक चेतना के प्रसार का भी माध्यम बनता है।
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