राज्यपाल हरिभाऊ बागडे: वास्तविक खुशहाली के लिए मानवीय मूल्य जरूरी
जयपुर में ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आर्थिक प्रगति से अधिक जरूरी नैतिकता और मानसिक शांति है।

तस्वीर में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे जयपुर में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 10 अक्टूबर। खुशी, कल्याण और स्वतंत्रता मानव विकास के मुख्य आधार हैं, लेकिन वास्तविक खुशहाली केवल धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं से हासिल नहीं की जा सकती। इसके लिए विवेक, समझदारी, ईमानदारी, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का होना जरूरी है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को जयपुर में आयोजित ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम एंड फेस्टिवल जयपुर 2026 में यह बात कही। उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने तथा भेदभाव मुक्त वातावरण तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
राज्यपाल श्री बागडे बिड़ला सभागार में वर्ल्ड हैप्पीनेस फाउंडेशन, इंडिया चैप्टर, जयपुर की ओर से आयोजित ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम एंड फेस्टिवल जयपुर 2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। खुशी के लिए विवेक, समझदारी, ईमानदारी और नैतिकता सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि ये गुण समाज में व्याप्त हो जाएं तो हर ओर खुशहाली का प्रसार हो सकता है। उन्होंने देश और समाज के भविष्य को लेकर सभी से चिंतन और मनन करने की आवश्यकता जताई।
राज्यपाल ने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय झूठ को सच बताने की होड़ मची हुई है, लेकिन लोग सजग रहेंगे तो सत्य हमेशा सत्य ही रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी आयुष्मान भारत योजना संचालित की जा रही है। देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह प्रगति कई देशों को रास नहीं आ रही है। उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और भेदभाव से मुक्त वातावरण के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
श्री बागडे ने कहा कि खुशहाली का पैमाना केवल धन-दौलत या भौतिक सुख-सुविधाएं नहीं हैं। वास्तविक खुशहाली मानसिक शांति, अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत रिश्तों से जुड़ा गहरा अहसास है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने विकास का ऐसा मॉडल अपनाया, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर, प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक प्रगति को मुख्य आधार बनाया गया। किसी भी विकसित देश के लिए ये सभी चीजें जरूरी हैं, लेकिन इनसे भी अधिक महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य हैं।
राज्यपाल ने अंग्रेजों के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारत को गुलामी के दौर में भूखे मरने पर मजबूर किया। लॉर्ड मैकाले ने भारतीय शिक्षा पद्धति को बर्बाद किया और गुरुकुल बंद करवा दिए। देश को गुलाम बनाए रखने के लिए उद्योग-धंधे बंद किए गए और लोगों के सामने भूखे मरने जैसी परिस्थितियां पैदा की गईं। इसके बावजूद अंग्रेजों ने कहा कि वे भारत में समृद्धि ला रहे हैं। इसके जवाब में वर्ष 1922 में महात्मा गांधी ने अपने भाषण में देश में भूखे मरने जैसी परिस्थितियों का उल्लेख किया और इनसे बचने के लिए स्वदेशी पर जोर देने की बात कही।
उन्होंने प्रसन्नता की कुंजी बताते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने पास उपलब्ध चीजों में संतोष का अनुभव करना चाहिए। खुशी केवल पैसे से नहीं मिल सकती। इसके लिए भाग-दौड़ के साथ अपने शरीर पर भी ध्यान देना जरूरी है। दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति के रूप में एलेन मस्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पैसा ही सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्क चाहते हैं कि उनकी कंपनियां यहां स्थापित हों और भारत उनका बाजार बने, लेकिन यहां के लोग सब समझते हैं।
श्री बागडे ने कहा कि ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जिसका उत्पादन भारत में नहीं होता। इससे कई देशों का बाजार बंद हो रहा है। अब वे नहीं चाहते कि भारत तेजी से विकसित हो। उन्होंने कहा कि देश को कमजोर करने के लिए कई ताकतें काम कर रही हैं। प्रतिभाएं भारत में तैयार होती हैं, विकसित देशों में नहीं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी से कोई खतरा नहीं है।
राज्यपाल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा व्यक्ति के बजाय समग्रता के विकास पर ध्यान दिया। इसी दृष्टिकोण से व्यक्ति, परिवार और समाज का विकास संभव है तथा सभी की खुशहाली सुनिश्चित की जा सकती है।
इससे पहले राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम एंड फेस्टिवल जयपुर 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उनके संबोधन का केंद्र यह रहा कि आर्थिक प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता, मानसिक शांति और सामाजिक समरसता को महत्व दिए बिना खुशहाल समाज की कल्पना पूरी नहीं हो सकती।

