जयपुर, 20 दिसंबर। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने शनिवार को भारतीय शिक्षण मंडल की वार्षिक पत्रिका “रश्मिपथ” के विशेष अंक भारतीय ज्ञान परंपरा का भव्य विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति के अद्भुत समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में मनुष्य बनने के मूल सिद्धांत को सर्वोच्च महत्व दिया गया है।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा, “भारतीय ज्ञान परंपरा ज्ञान और विज्ञान, लौकिक और पर-लौकिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। प्राचीन शिक्षा प्रणाली में ‘मर्नुभव’ का महत्व है, अर्थात् पहले मनुष्य बनो। मनुष्य बनने का असली अर्थ है अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए भी जीवन जीना।”

उन्होंने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में भारतीय ज्ञान परंपरा के बीज निहित हैं। भारतीय संस्कृति में निष्ठा और संस्कारों की स्थिरता ही देश की एकात्मता की कुंजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को विश्व स्तर पर जो पहचान मिलेगी, उसके मूल में भारतीय संस्कार और संस्कृति ही होगी।

इससे पहले राज्यपाल ने पत्रिका के विमोचन के समय कहा कि “रश्मिपथ” में प्रकाशित सभी लेख विभिन्न वर्गों के पाठकों के लिए पठनीय हैं और इसमें शिक्षा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को संकलित किया गया है। इस पत्रिका का प्रकाशन भारतीय ज्ञान और शिक्षा की गहन परंपराओं को आमजन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा।

राज्यपाल के इस संदेश ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति और शिक्षा की जड़ों में निहित मूल्य आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं।

Pratahkal Bureau

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