अजमेर/जयपुर। तीर्थराज पुष्कर की पावन धरा पर रविवार को श्रद्धा और भक्ति का एक नया अध्याय जुड़ गया, जब राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने पुष्कर स्थित 'साईदत्त विकास साईधाम मंदिर' के नवनिर्मित विकास कार्यों का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भव्य शुभारंभ किया। मंत्रोच्चार की गूंज और भक्तिमय वातावरण के बीच राज्यपाल ने न केवल मंदिर के द्वार आम जन के लिए खोले, बल्कि इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के एक नए वैश्विक क्षितिज पर स्थापित करने का संकल्प भी दोहराया।

समारोह का शुभारंभ राज्यपाल श्री बागडे द्वारा मंदिर के गर्भगृह में पूर्ण विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के अनुसार की गई विशेष पूजा से हुआ। इस आध्यात्मिक अवसर पर उनके साथ केंद्रीय कृषि मंत्री श्री भागीरथ चौधरी भी मौजूद रहे, जिन्होंने पूजा में सम्मिलित होकर राष्ट्र की समृद्धि की कामना की। साईदत्त विकास साईधाम के संस्थापक श्री विकास रूणवाल ने राज्यपाल को ट्रस्ट द्वारा पूर्ण किए गए विभिन्न विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

राज्यपाल ने मुख्य साई मंदिर में दर्शन के पश्चात परिसर के भीतर स्थापित अन्य देव विग्रहों के समक्ष भी शीश नवाया। उन्होंने चावड़ी मंदिर और द्वारका माई में बाबा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उन्होंने नवग्रह मंदिर और 24 तीर्थंकर मंदिर के दर्शन कर सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। श्री गणेश, दुर्गा माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता, विट्ठल रूक्मणी और राधाकृष्ण मंदिर में विशेष अर्चना करने के बाद राज्यपाल 11 मुखी हनुमान मंदिर और शिव मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पुष्कर की महिमा अनंत है और यहाँ साई मंदिर के साथ अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों की स्थापना से धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि पुष्कर के प्राचीन केंद्रों के साथ यह नवीन परिसर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में भारी वृद्धि होगी।

कार्यक्रम के समापन पर राज्यपाल ने एक सामाजिक संदेश देते हुए आगंतुकों से पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण हेतु अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने तर्क दिया कि वृक्षारोपण से न केवल वर्षा की मात्रा में सुधार होगा, बल्कि इसका सीधा लाभ देश के अन्नदाता किसानों को मिलेगा, जो अंततः राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। भक्ति, विकास और प्रकृति के इस अनूठे संगम ने पुष्कर की गौरवशाली विरासत में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

Pratahkal Bureau

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