मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा को धरातल पर उतारने की दिशा में जल संसाधन विभाग ने एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। जयपुर की द्रव्यवती नदी पर स्थित ऐतिहासिक सांगानेर के गूलर बांध के पुनरुद्धार और इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। बांध के सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण और समग्र विकास के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके तहत जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत के कुशल निर्देशन में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर कार्यादेश भी जारी कर दिए गए हैं।

परियोजना की गंभीरता और प्रगति का जायजा लेने के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव श्री भुवन भास्कर ने गूलर बांध का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री सुरेश खतानिया, अधीक्षण अभियंता श्री रमाशंकर और अधिशासी अभियंता श्री अनिल थालौर भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच और समस्त दस्तावेजों के सुव्यवस्थित संधारण के कड़े निर्देश दिए। बांध के ओवरफ्लो स्ट्रक्चर की जर्जर स्थिति को देखते हुए उन्होंने इस संरचना के तकनीकी पुनःडिजाइन और नए सिरे से निर्माण करने का आदेश दिया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी न रहे।

मुख्य अभियंता श्री भुवन भास्कर ने स्पष्ट किया कि गूलर बांध को केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में उभारा जाएगा। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए भव्य एवं आकर्षक घाटों का निर्माण होगा और सुव्यवस्थित उद्यानों को विकसित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को लैंडस्केपिंग के लिए एक दीर्घकालिक और समग्र योजना बनाने के निर्देश दिए ताकि यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। गूलर बांध के निरीक्षण के पश्चात मुख्य अभियंता ने नेवटा बांध का भी दौरा किया और वहां भी पर्यटन विकास की संभावनाओं को मूर्त रूप देने के निर्देश दिए।

तकनीकी पक्षों पर जानकारी देते हुए अधिशासी अभियंता श्री अनिल थालौर ने बताया कि मानसून के दौरान अतिरिक्त जल प्रवाह के बेहतर प्रबंधन के लिए बांध पर नए गेट लगाए जाएंगे। इन गेटों की सहायता से नहरों में पानी के बहाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, चंदलाई की ओर जाने वाली नहर की सुरक्षा के दृष्टिगत दोनों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण भी किया जाएगा। जल संसाधन विभाग की यह कवायद केवल गूलर बांध तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग कानोता, नेवटा और चंदलाई जैसे महत्वपूर्ण बांधों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इन दूरगामी प्रयासों से न केवल सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि मानसून के दौरान शहरी जल निकासी और जल प्रबंधन की समस्याओं का भी स्थाई समाधान प्राप्त हो सकेगा।

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