राजस्थान की राजनीति में वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे 'इंतजार शास्त्र' पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे उनकी राजनीतिक हताशा और उपेक्षा का परिणाम करार दिया है। तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस को रसातल में पहुंचाने वाले गहलोत को अब उनकी अपनी ही पार्टी ने किनारे कर दिया है और वे अपनी खीझ मिटाने के लिए सोशल मीडिया पर मिथ्या तथ्यों के साथ ट्वीट कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि गहलोत के वर्तमान हालात पर "फूलां बाई फूलगी, गेल का दिन भूलगी" वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है।

सांसद तिवाड़ी ने 'शास्त्र' शब्द के उपयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत में केवल 64 शास्त्र हुए हैं और इस पवित्र शब्द को राजनीतिक प्रपंच से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि गहलोत को इसे 'इंतजार शास्त्र' के बजाय 'इजहार नामा' कहना चाहिए, क्योंकि वे केवल अपनी उपेक्षा और हताशा का इजहार कर रहे हैं। तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में सचिन पायलट और राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा के बढ़ते प्रभाव के कारण गहलोत को तवज्जो नहीं मिल रही है। उन्होंने याद दिलाया कि गहलोत के कार्यकाल में प्रदेश का युवा पेपरलीक से पीड़ित था, बहन-बेटियां सुरक्षा और किसान अपनी जमीन बचाने का इंतजार कर रहे थे। जेजेएम घोटाले में उनके मंत्री और अधिकारी जेल तक पहुंचे, जो उनकी सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने में विफलता का प्रमाण है।

चिकित्सा क्षेत्र का ब्योरा देते हुए तिवाड़ी ने गहलोत के दावों को आंकड़ों के जरिए खारिज किया। उन्होंने बताया कि गहलोत सरकार के पहले दो वर्षों में एक भी नई पीएचसी नहीं खुली, जबकि भजनलाल सरकार ने 6 पीएचसी, 84 सीएचसी और 61 उप जिला अस्पताल खोलकर कीर्तिमान स्थापित किया है। आईपीडी टॉवर प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 400 करोड़ की योजना को 700 करोड़ तक पहुंचाकर जनता के पैसे की बर्बादी की गई और 1500 बेड के अस्पताल के लिए महज 190 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था करना उनकी अदूरदर्शिता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 31 (23 नए) हो गई है।

तिवाड़ी ने गहलोत की घोषणाओं को 'चुनावी लोकलुभावनवाद' बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल की 4148 घोषणाओं में से 2208 अधूरी रहीं और 626 पर तो एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। इसके विपरीत, भजनलाल सरकार ने 2719 घोषणाओं में से 90 प्रतिशत पर स्वीकृतियां जारी कर दी हैं। जोधपुर के विकास के दावों पर भी उन्होंने घेरा और बताया कि 765 केवी और 400 केवी सब स्टेशनों के लिए घोषित करोड़ों के बजट के बावजूद धरातल पर खर्च शून्य रहा। उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा सरकार ने 420 पेपरलीक माफियाओं को जेल भेजा और रिकॉर्ड नियुक्तियां देकर प्रदेश में सुशासन स्थापित किया है, जिससे विचलित होकर पूर्व मुख्यमंत्री भ्रामक तथ्य परोस रहे हैं।

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