जयपुर, 12 जनवरी, 2026: गुलाबी नगरी जयपुर में स्वास्थ्य के प्रति सजगता और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल ने 'हेल्थ कनेक्ट' कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम का सफल आयोजन किया। अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन, राजस्थान के सहयोग से आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को आधुनिक जीवनशैली से उपजने वाली बीमारियों के प्रति सचेत करना और समय रहते जांच व उपचार के प्रति प्रोत्साहित करना था। हॉस्पिटल परिसर में जुटे समुदाय के सदस्यों के बीच विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य के उन पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, लेकिन जीवन के लिए बेहद जोखिम भरे साबित हो सकते हैं।

इस गहन स्वास्थ्य चर्चा की शुरुआत करते हुए देश के प्रतिष्ठित हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंघल, जो फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर हैं, ने हृदय स्वास्थ्य की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। डॉ. राहुल सिंघल ने बेहद गंभीरता के साथ इस बात को रेखांकित किया कि किस प्रकार आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, मानसिक तनाव और असंतुलित खान-पान युवाओं को भी हृदय रोगों की ओर धकेल रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'हेल्थ कनेक्ट' जैसे मंचों की प्रासंगिकता तभी है जब समाज शुरुआती चेतावनी के संकेतों को पहचानना सीखे और समय पर कार्डियक स्क्रीनिंग को अपनी प्राथमिकता में शामिल करे, ताकि जानलेवा जटिलताओं को जन्म लेने से पहले ही रोका जा सके।

हृदय स्वास्थ्य के साथ-साथ श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पल्मोनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंकित बंसल ने फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते ग्राफ पर अपनी विशेषज्ञ राय साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदूषण और बदलती परिस्थितियों के कारण अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियां अब एक बड़ा बोझ बन चुकी हैं। डॉ. अंकित बंसल ने इस संवाद के दौरान फेफड़ों की सेहत से जुड़े मिथकों को दूर किया और इस बात पर बल दिया कि जागरूकता और उपचार का निरंतर पालन ही जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि यदि सही समय पर डॉक्टरी परामर्श लिया जाए, तो सांस की गंभीर से गंभीर समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

कैंसर जैसे भयावह विषय पर चर्चा करते हुए ऑन्कोसर्जरी (हेड एंड नेक) विभाग के कंसल्टेंट डॉ. जितेंद्र शर्मा ने कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान को जीवनदान के समान बताया। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जागरूकता के अभाव में सिर और गर्दन के कैंसर के अधिकांश मामले अंतिम चरण में अस्पताल पहुंचते हैं, जहां उपचार कठिन हो जाता है। डॉ. जितेंद्र शर्मा ने तंबाकू, शराब के सेवन और ओरल हाइजीन की अनदेखी को इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि इस प्रकार के आउटरीच प्रोग्राम का मुख्य ध्येय लोगों को इतना सशक्त बनाना है कि वे शुरुआती लक्षणों को पहचानें और बिना डरे विशेषज्ञ की सलाह लें, क्योंकि कैंसर से जंग में शीघ्र पहचान ही सबसे बड़ा हथियार है। यह कार्यक्रम न केवल एक संवाद था, बल्कि जयपुर वासियों के लिए बेहतर कल की दिशा में एक प्रेरणादायक स्वास्थ्य क्रांति के रूप में संपन्न हुआ।

Pratahkal Newsroom

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